हमारी धरती पर मानव का अस्तित्व कितना प्राचीन है ?

।।श्रीगणेशाय नमः।।

आजकल कुछ लोग कहते हैं ,जब मानव सभ्यता 7,000 वर्ष प्राचीन है फिर रामायण-महाभारत प्रामाणिक कैसे हो सकते हैं ? होमोसेपियंस की उत्पत्ति 40,000 वर्ष पहले हुई तब वह जंगली शिकारी था जो बिना कपड़ों के रहता था। जानवरों की खाल और वृक्षों की छाल पहनता था। पत्थरों के औजारों का प्रयोग करता था। उसे किसी भी धातु का ज्ञान नहीं था। उस युग को पाषाणयुग कहा गया

( 17,000 से 9,000 वर्ष पहले के समय को नव पाषाणयुग कहा गया ) फिर 9,000 वर्ष पहले मानव को धातु का ज्ञान हुआ और जिस धातु का ज्ञान पहले हुआ वह था स्वर्ण लेकिन स्वर्ण कठोर न होने के कारण औजारों के रूप में प्रयोग नहीं हो सका । फिर रजत (चाँदी) की खोज हुई वह भी स्वर्ण की तरह नम्र धातु होने से औजार के रूप में प्रयोग नहीं हो सका । लगभग 7,500 वर्ष पहले मानव ने ताँबे की खोज की जो कि रजत और स्वर्ण से कठोर है जिससे औजारों का प्रयोग करना मानव ने प्रारम्भ किया । इस युग को (7,500-5500 वर्ष पूर्व ) ताम्रयुग कहा गया। फिर मानव ने 5,500 वर्ष पूर्व ताम्र से कठोर काँस्य की खोज की ,जो कि धातुओं के मिश्रण से बनता है । अब मनुष्य ने काँस्य के औजारों का उपयोग प्रारम्भ किया ,इस युग को काँस्ययुग कहा गया जो कि सबसे कठोर धातु लोहे की उत्पत्ति के समय तक चलता रहा (5,500 वर्ष पूर्व से 3,500 वर्ष पूर्व ) । सबसे अंत में मानव ने लोहे की खोज की जो सबसे कठोर धातु है । इस युग को लोहयुग (3,500 वर्ष पूर्व से 2300 वर्ष पूर्व तक ) मानव ने 10,000 वर्ष पहले भाषा का विकास किया, धातुओं का ज्ञान 7,500 वर्ष पहले की फिर हजारों लाखों वर्ष पुरानी पौराणिक कथाएँ सत्य कैसे हो सकती हैं ? ये ब्राह्मणों की कपोल कल्पना हैं । इस तरह की पोस्ट करके क्षुद्र तर्क देकर हमारी संस्कृति पर आघात किया जाता है।

इस विषय पर यही कहन उचित है कि संसार के किसी जाहिल से ये कह दिया कि मानव पहले बन्दर था ,फिर वह आदिमानव बना और कुछ हजार वर्ष पहले ही सभ्य मनुष्य बना । और सबसे बड़े जाहिल वे हैं ,जिन्होंने अपनी बुद्धि से विचार न करके उस जाहिल के मत को सिद्धान्त मानकर अपने पूर्वजों को निहायती जङ्गली नंगा घूमनेवाला अर्द्धपशु था। अब मनुष्य का अस्तित्व पर लिखते हैं ।

मानव के अस्तित्व की प्राचीनताके लाखों– करोड़ों वर्ष पुराने प्रमाण उपलब्ध हैं । जितना प्राचीन मानव की धरती पर उपस्थिति है, उतना ही प्राचीन मानव द्वारा धातुओं का उपयोग है।

प्रो० डब्ल्यू ड्रेपर को 1.40 लाख वर्ष प्राचीन हाथियों और अन्य जानवरोंके साथ आधुनिक मानव की हड्डियाँ भी मिली थीं, यह पूर्ण सभ्य मनुष्य की हड्डियाँ थीं।

केन्या के संग्रहालय के प्रो० डॉ० लीके को 1.70 लाख वर्ष पूर्व मानव का अस्थिपंजर मिला यह आदिमानव का नहीं वर्तमान सभ्य मनुष्य का अस्थिपंजर था।

अमेरिका के येल विश्वविद्यालय के प्रो० ई०एल० साइमन को 1911 में 1.40 करोड़ वर्ष प्राचीन आधुनिक सभ्य मानव का जबड़ा मिला था।

हजारों वर्ष पहले यदि मनुष्य 3 फीट का आदिमानव था तब हजारों वर्ष प्राचीन 8 से 12 फीट के मानव कंकाल कैसे प्राप्त होते हैं ?

यदि मानव ने 7,500 वर्ष पहले धातु की खोज की तो 6 लाख वर्ष पुराना मानव निर्मित ताला किसने और कैसे बनाया ?

अगस्त 1923 को मि०जॉन टी०रोड को नेवादा में एक 50 लाख वर्ष पुराने मानव जूते की तल्ला पत्थरों में दबा मिला था जिसपर आधुनिक जूतों की तरह ही मजबूत और बारीक सिलाई थी।

1934 में वैज्ञानिकों को चट्टानों में दबा एक शुद्ध लोहे का बना 14 करोड़ से अधिक प्राचीन हथौड़ा मिला था। उस हथौड़े की लकड़ी अब कोयला बनने लगी है लकड़ी के कोयला बनने की प्रक्रिया करोड़ों वर्षों में होती है।

1998 में रूस के वैज्ञानिकों को मास्कों शहर के दक्षिण में 30 करोड़ वर्ष प्राचीन लोहे का एक पेच मिला था जो किसी करोड़ों वर्ष प्राचीन किसी यन्त्र का रहा होगा। लाखों करोड़ों वर्ष प्राचीन अनेकों प्रमाण हैं हमने कुछ ही प्रमाण दिए, मानव को करोड़ों वर्ष प्राचीन सिद्ध करते हैं लेकिन आप कब तक डार्विन के बन्दर बने रहेंगे।

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