समाज के सभी लोगों से अपील, कि वो डॉक्टराें को भगवान का दर्जा न दे कर सिर्फ उनको मामुली इंसान ही
समझें ,क्योकिं क्योंकि लोग जितना बुरा बर्ताव भगवान के साथ करते हैं वो हम डॉक्टर सहने को तैयार नहीं है —
1–हर साल लोग भगवान के नाम पर अरबों रूपये का
चढ़ावा चढ़ाते हैं ,उसमे भगवान को क्या एक पैसा भी मिलता है ?लोग अपनी पसंद की कई किलो मिठाई (भगवान की पसंद की नहीं )खरीद कर प्रसाद चढ़ाते हैं .फिर प्रभु की मूर्ती के होठों पर एक चुटकी मिठाई चिपका कर बाकी की सब चट कर जाते हैं .इसी तरह बड़े होस्पिटल और फार्मा कंपनी डॉक्टर के नाम पर करोङों कमा कर ज्यादातार पैसा खुद रख लेते हैं और डॉक्टर के नाम बदनामी की झूठन छोड़ देते हैं.(लोग ये समझते हैं के अस्पताल मैं वह जितना पैसा जमा करते हैं वो सब डॉक्टर ले जाता है जबकि हकीकत में अस्पताल के बिल का 3से 5 percent ही डॉक्टर को मिलता है )
2 बड़े बड़े घरों में रहने वाले भी भगवान के लिये 3×3
फुट का संगमरमर का मंदिरनुमा दङबा बनाते हैं ,और सारे भगवानों को उसमें बेरहमी से ठूंस देते हैं .फिर लोग ये उम्मीद करते हैं की five star होस्पिटलाें में काम करने वाले सभी डॉक्टर अस्पताल के किसी छोटे से कमरे (10×10 foot)में बेंच पर पड़े रहें
और दिन भर में दो कप चाय पीकर , 24 घंटे हाजिरी बजाये .
3–गर्मी में भी geyser के पानी से नहाने वाले लोग भी कड़कती ठंड में भगवान को सुबह सुबह ठंडे पानी से नहलाते है .इसी तरह वो समझते हैं की अस्पताल की इमारत ना होने पर ,डॉक्टर को घनघोर सर्दी या गर्मी में भी गांव में पेड़ के नीचे बैठ कर मरीज देखना चाहिए .
4-अगर आप अपने किसी मित्र को birthday gift के रुप में अपने कटे बालों का थैला दें तो क्या वो खुश होगा ?मगर लोग भगवान को अपने बदबूदार ,जूँ और dandruff वाले बाल चढाकर खुश करना चाहते है .इसी तरह सबको लगता है की मल मूत्र और मवाद और बदबू के बीच खङा हो कर 36 घंटे की लगातार ड्यूटी करने के बाद भी डॉक्टर खुश रहे और और किसी फाइव स्टार होटल के वेटर की तरह मरीजों की चापलूसी करके बात करता रहे.
5-जिस तरह भगवान की कोई privacy नहीं होती कि कोई भी भक्त किसी भी समय जाेर -जाेर से घंटी बजाकर उसकी पूजा कर सकता है ,उसी तरह कोई भी मरीज डॉक्टर के mobile की घंटी कभी भी बजा सकता है और रात में दो बजे फ़ोन करके ये पूछ सकता है की सुबह दलिया खाना है या नहीं ?
6–जिस तरह अगर कोई student साल भर ना पढ़े और exam में फेल हो जाये , तो भी कहता है कि हे भगवान तेरी वजह से फेल हो गया ,वैसे ही हर शराबी ,कबाबी और लापरवाह इंसान अपने खराब स्वास्थ्य का जिम्मेदार डॉक्टर को ही मानता है .
7-जिस तरह त्योहार खत्म होने के बाद पूजी जाने वाली मूर्तियों को या तो नदी में बहा दिया जाता है या किसी पुराने पेङ के नीचे कुत्तों की निगरानी में फेंक दिया जाता है ,मरीज ठीक होने के बाद मरीज के रिश्तेदारों द्वारा डॉक्टर का यही हाल होता है .
8 – अगर डॉक्टर ओपीडी में बैठकर मरीज को देखते हुए कभी टॉयलेट भी चला जाए तो या कुछ खाने चला जाये तो मरीज बड़ -बड़ करने लगते हैं क्योंकि उसके दिमाग में यह होता है कि भगवान की तरह डॉक्टर को भी कुछ खाने पीने या टॉयलेट जाने की जरूरत नहीं है!
9- जिस तरह आदमी भगवान पर सवा रुपए का प्रसाद चढ़ा कर लाखों के फायदे की उम्मीद करता है ,उसी तरह मरीज ₹200 फीस देकर डॉक्टर पर दो करोड़ का केस कर सकता है!
इस लिये समाज के ठेकेदारों हम भगवान के पद से इस्तीफा देते हैं .बस हमें इंसानों की तरह चैंन से जीने दो नहीं तो हमारी काैम खत्म हो जायेगी










