Key Points
- यह संभावना है कि बाजार में बिकने वाली दवाएं ब्रांडेड होती हैं, जो अनुसंधान, विकास और विपणन लागत के कारण महंगी होती हैं, जबकि जन औषधि केंद्रों पर सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हैं।
- सरकार आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है, लेकिन सभी दवाओं पर नियंत्रण नहीं है, जिससे बाजार में कीमतें अधिक हो सकती हैं।
- डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, लेकिन गुणवत्ता और प्रभावशीलता की चिंताओं के कारण वे अक्सर ब्रांडेड दवाएं चुनते हैं, जिससे लागत बढ़ती है।
- यह मुद्दा जटिल है, और विभिन्न पक्षों के हितों को संतुलित करना चुनौतीपूर्ण है।
Why Are Market Medicines More Expensive?
बाजार में बिकने वाली दवाएं आमतौर पर ब्रांडेड होती हैं, जिनकी कीमतें उच्च होती हैं क्योंकि कंपनियां अनुसंधान, विकास और विपणन पर बहुत खर्च करती हैं। दूसरी ओर, जन औषधि केंद्र जेनेरिक दवाएं बेचते हैं, जो पेटेंट समाप्त होने के बाद बनाई जाती हैं और इसलिए सस्ती होती हैं। यह कीमत अंतर स्वाभाविक है, लेकिन सरकार केवल आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है, जैसे National Pharmaceutical Pricing Authority द्वारा निर्धारित।
Why Is the Market Allowed Higher Prices?
बाजार में गैर-आवश्यक दवाओं की कीमतें बाजार की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती हैं, और सरकार सभी दवाओं पर कीमत नियंत्रण नहीं लगा सकती। यह संतुलन उद्योग को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करता है, लेकिन इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग पर बोझ बढ़ सकता है।
Why Are Doctors Blamed?
डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं लिखने के लिए कहा जाता है, लेकिन वे अक्सर ब्रांडेड दवाएं चुनते हैं, शायद गुणवत्ता या प्रभावशीलता की चिंताओं के कारण। कुछ मामलों में, फार्मा कंपनियां डॉक्टरों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे रोगियों को अधिक खर्च करना पड़ता है। यह मुद्दा जटिल है, और दोनों पक्षों की चुनौतियों को समझना महत्वपूर्ण है।
विस्तृत विश्लेषण
यह रिपोर्ट जन औषधि केंद्रों और बाजार में दवाओं की कीमत अंतर, साथ ही डॉक्टरों की भूमिका पर गहनता से प्रकाश डालती है। यह उपयोगकर्ता के प्रश्न को संबोधित करते हुए, संबंधित सभी पहलुओं को शामिल करती है।
जन औषधि केंद्र: एक अवलोकन
जन औषधि केंद्र प्रधानमंत्री भर्तिया जन औषधि परियोजना (PMBJP) का हिस्सा हैं, जो 2008 में शुरू हुई थी और 2016 में विस्तारित की गई। इन केंद्रों का उद्देश्य गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराना है, विशेष रूप से गरीब और मध्यम वर्ग के लिए। वर्तमान में, देश में 10,000 से अधिक जन औषधि केंद्र हैं, और सरकार का लक्ष्य इसे 25,000 तक बढ़ाना है, जैसा कि प्रधानमंत्री की स्वतंत्रता दिवस घोषणा में उल्लेख किया गया है।
इन केंद्रों पर दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% सस्ती हैं, क्योंकि वे जेनेरिक हैं और बिना अतिरिक्त विपणन लागत के उत्पादित होती हैं। उदाहरण के लिए, मधुमेह की दवा जो बाजार में 3000 रुपये प्रति माह की हो सकती है, जन औषधि केंद्र पर 10-15 रुपये में उपलब्ध हो सकती है।
ब्रांडेड बनाम जेनेरिक दवाएं: कीमत अंतर का कारण
ब्रांडेड दवाएं उन कंपनियों द्वारा बनाई जाती हैं जिन्होंने इनका विकास किया और पेटेंट प्राप्त किया। इनकी उच्च कीमतें निम्नलिखित कारणों से हैं:
- अनुसंधान और विकास लागत: नई दवाओं के विकास में अरबों रुपये खर्च होते हैं।
- विपणन और ब्रांडिंग: फार्मा कंपनियां डॉक्टरों और रोगियों को प्रभावित करने के लिए भारी विज्ञापन करती हैं।
- पेटेंट संरक्षण: पेटेंट अवधि के दौरान कंपनियां उच्च कीमतें वसूल सकती हैं, क्योंकि प्रतिस्पर्धा नहीं है।
जेनेरिक दवाएं, दूसरी ओर, पेटेंट समाप्त होने के बाद बनाई जाती हैं। कई कंपनियां इन्हें उत्पादित करती हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और कीमतें कम हो जाती हैं। उदाहरण के लिए, Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana – Wikipedia के अनुसार, जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं के समान प्रभावशाली होती हैं, लेकिन सस्ती होती हैं।
कीमत नियंत्रण और सरकार की भूमिका
भारत में, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करता है, जैसा कि Pricing & Reimbursement Laws and Regulations 2024 | India में वर्णित है। ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO) 2013 के तहत, केवल राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM) में शामिल दवाओं की कीमतें नियंत्रित होती हैं, जो लगभग 3762 दवाओं को कवर करती हैं। गैर-आवश्यक दवाओं की कीमतें बाजार द्वारा निर्धारित होती हैं, जो कीमत अंतर का एक प्रमुख कारण है।
बाजार को उच्च कीमतें क्यों दी जाती हैं?
बाजार में उच्च कीमतें इसलिए दी जाती हैं क्योंकि सरकार सभी दवाओं पर कीमत नियंत्रण नहीं लगा सकती। यह उद्योग को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करता है, लेकिन इससे रोगियों पर वित्तीय बोझ बढ़ता है। उदाहरण के लिए, Explainer: How drug prices are regulated in India के अनुसार, केवल 14% दवाओं (मूल्य के आधार पर) की कीमतें नियंत्रित होती हैं, जबकि शेष बाजार पर निर्भर हैं।
डॉक्टरों की भूमिका और उनकी आलोचना
डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जैसा कि Prescribing generics: All in a name – PMC में उल्लेख किया गया है। 2016 में, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने नियम बनाए कि डॉक्टरों को जेनेरिक नामों से दवाएं लिखनी चाहिए। फिर भी, कई डॉक्टर ब्रांडेड दवाएं चुनते हैं, शायद निम्नलिखित कारणों से:
- गुणवत्ता की चिंता: कुछ जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं, जैसा कि The scary truth behind generic drugs in India – Hindustan Times में बताया गया है।
- फार्मा कंपनियों का प्रभाव: कंपनियां डॉक्टरों को प्रोत्साहन दे सकती हैं, जिससे ब्रांडेड दवाओं का प्रिस्क्रिप्शन बढ़ता है।
- रोगी की धारणा: रोगी अक्सर ब्रांडेड दवाओं को बेहतर मानते हैं, और डॉक्टर उनकी अपेक्षाओं को पूरा करते हैं।
इसके परिणामस्वरूप, रोगियों को अधिक खर्च करना पड़ता है, और डॉक्टरों को इसकी आलोचना का सामना करना पड़ता है।
हाल के विकास और नीतियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन औषधि केंद्रों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे कि PM’s address at the interaction with beneficiaries of Jan Aushadhi Yojana में उल्लेख किया गया है। 2024 में, उन्होंने 10,000वें केंद्र का उद्घाटन किया और 25,000 तक पहुंचने का लक्ष्य रखा। इसके अलावा, सरकार ने डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं लिखने के लिए और अधिक दिशानिर्देश जारी किए हैं, लेकिन कार्यान्वयन में चुनौतियां बनी हुई हैं।
तालिका: कीमत अंतर का तुलनात्मक विश्लेषण
निम्नलिखित तालिका ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं के बीच कीमत अंतर को दर्शाती है: दवा का प्रकारउदाहरणबाजार की कीमत (लगभग)जन औषधि केंद्र की कीमत (लगभग)कीमत अंतर (%) ब्रांडेड मेटफॉर्मिन 500mg 3000 रुपये/माह – – जेनेरिक मेटफॉर्मिन 500mg – 10-15 रुपये/माह 50-90% सस्ती
निष्कर्ष
कीमत अंतर का मुख्य कारण ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं के बीच उत्पादन और विपणन लागत का अंतर है। सरकार आवश्यक दवाओं की कीमतें नियंत्रित करती है, लेकिन बाजार में गैर-आवश्यक दवाओं की कीमतें उच्च हो सकती हैं। डॉक्टरों की आलोचना इसलिए होती है क्योंकि वे अक्सर जेनेरिक दवाएं लिखने से हिचकिचाते हैं, जो रोगियों के लिए अधिक खर्च का कारण बनता है। यह मुद्दा जटिल है, और इसे हल करने के लिए गुणवत्ता आश्वासन, जागरूकता और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है।
Key Citations
- National Pharmaceutical Pricing Authority
- Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana – Wikipedia
- Pricing & Reimbursement Laws and Regulations 2024 | India
- Prescribing generics: All in a name – PMC
- Explainer: How drug prices are regulated in India
- PM’s address at the interaction with beneficiaries of Jan Aushadhi Yojana
- The scary truth behind generic drugs in India – Hindustan Times
- government-to-open-25000-jan-aushadhi-kendras-to-make-medicines-available-at-affordable-prices/










