NMC BILL

IMA पदाधिकारी द्वारा दिल्ली में दिए गये निराशाजनक बयान ने यह साबित कर दिया

कि उन्हें NMC बिल से इसलिए परेशानी नही है कि यह गरीब विरोधी है

बल्कि उन्हें इस बिल से इसलिए दिक्कत है

क्यों कि उन्हें इससे अपने मक्खन मलाई छिनने का खतरा है ..,.

मेडिकल विभाग में आपस में ही छोटा बड़ा समझने की परम्परा

आज से नही बरसों से चली आ रही है .

पहले सर्जरी विशेषग्य खुद को भगवान मानते थे

और रेडियोलोजिस्ट और पैथोलोजिस्ट को तुच्छ समझते थे ,

फिर धीरे धीरे परिस्थितियाँ बदली

और आज

रेडियोलोजी और पैथोलोजी टॉप ब्रांच समझी जाती हैं ,

डिग्री द्वारा pg करने वाले चिकित्सक डिप्लोमा करके pg करने वाले चिकित्सकों को

हीन समझते हैं

उसी तरह होम्योपैथी , आयुर्वेद , यूनानी , दंतचिकित्सा , नर्स , कम्पाउंडर की अपनी अलग केटेगरी बना रखी

मैं हमेशा दुनिया से उल्टा चलता हूँ

भीड़ क्या सोचती है वेसा मैं भी सोचूं यह तो कोई जरुरी नहीं

असल में हमारा सिस्टम ही ऐसा है

पश्चिमी देशों में नर्स होना भी एक सम्मान जनक पेशा है परन्तु भारत में स्थिति उलट है

यहाँ छोटा और बड़ा काम से नहीं उसकी डिग्री से होता है

सच बात कोई स्वीकारना नही चाहता

असल बात यह है कि नर्स और कम्पाउडर अगर सडक पर आ जाए

तो एक डोक्टर की हिम्मत नही है कि अकेले अस्पताल चला ले

हमारे डेंटल विभाग में ही देख लीजिये

कि अगर लेब टेक्नीशियन घर बैठ जाएँ

तो डेंटल क्लिनिक चलाना मुश्किल पड़ जाए

ऐसे ही अगर आयुर्वेद , यूनानी , होम्योपैथी वाले चिकित्सक घर बैठ जाएँ

तो चिकित्सा व्यवस्था चरमरा जाए सरकार की

क्यों कि गाँव गाँव जाकर चिकित्सा संभालने की जिम्मेदारी इन्होने ही उठा रखी है अपने कन्धों पर

क्यों कि यह बात सच है

कि MBBS के बाद स्पेश्लाइजेशन और सुपर स्पेश्लाइजेशन बन्दा जनता की सेवा करने के लिए तो बिलकुल भी नही करता ,

और जब जनता की चिंता जनता का वोट लेकर मंत्री प्रधानमन्त्री बनने वाले नेताओं को ही नही है तो करोड़ों खर्च करके सुपर स्पेश्लाइजेशन करने वाले डॉक्टरों को क्यों होने लगी

असल में दूसरे को छोटा समझने का बीज हमारे अन्दर हमारी परवरिश में ही डाल दिया जाता है

तो दोस्तों चरक और सुश्रुत ने कोई MBBS या BDS या नर्सिंग कोर्स नहीं किया था

मेडिकल लाइन ही नही ,

बल्कि इंजिनयरिंग लाइन ,

टीचिंग लाइन

यानी हर प्रोफेशनल लाइन पढ़े लिखे गधों से भरी पड़ी है

जरुरी नहीं कि आज के युग में जिसके पास डिग्री है वह योग्य भी हो

योग्यता और डिग्री का कोई तालमेल ही नही है यह मुझे अब तक के अनुभव से पता चलता है

जरुरी नहीं कि जिसने बीएड कर रखी हो वह योग्य टीचर हीहो

चलिए अब मैं आता हूँ अपने उसी विषय पर कि यह जरुरी नही कि किसी ने MBBS कर रखी हो तो वह योग्य डॉक्टर हो या जिसने BDS कर रखी हो वह योग्य डेंटिस्ट हो

असल में चिकित्सा भी एक तरह का अनुभव आधारित विज्ञान है

जिसने जितने अधिक प्रयोग किये वह उतना बड़ा वैज्ञानिक

जिस देश में व्यापम जैसे घोटालों के जरिये फर्जी MBBS एडमीशन होते हों

उस देश में क्या भरोसा कि आपके हिस्से में कौन सा डॉक्टर आता हो

अतः डॉक्टर , टीचर , वकील चुनते समय उसका फीडबैक पहले अवश्य लें

क्यों कि ये तीन प्रोफेशन आपके जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं

एक खराब डॉक्टर आपके जीवन को खतरे में डाल सकता है

एक खराब शिक्षक आपके बच्चों के भविष्य को गर्त में ले जा सकता है

और एक खराब वकील आपके जीवन को परेशानियों से भर सकता है

सावधान रहें सुरक्षित रहें

योग्यता को बड़ी बड़ी डिग्रियों से नही उसके काम से आंकेंगे तो जीवन ज्यादा सुखद होगा!!!

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