डॉक्टर आप को जॉइन करके एक माह से ऊपर हो गए। परन्तु आपका काम दिखाई नही पड़ता।आप भी बाहर कम ही दिखते हो। आप पूरे समय क्या करते रहते हो? किस चीज में व्यस्त रहते हो?”
“कुछ नही MCQ करता रहता हूँ।यहीं रहता हूँ।”
“आपको क्या काम करना आता है?”
“सर, मुझे MCQ करना आता है।”
“नहीं पेशेंट देखकर उसे मैनेज करने की बात कर रहे हैं, हम। MCQ से तो मरीज ठीक नही होता!”
“……..”
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आप फिर डॉक्टर कैसे बन गए? वो भी स्पेशलिस्ट।”
“सर मेरी बड़ी इच्छा थी डॉक्टर बनने की।मैंने अपने पेरेंट्स को बताया। वे बहुत खुश हुए। टेंथ से कोचिंग में दाल दिया। बस सबेरे घर से निकले। स्कूल गए। वहां क्लास अटेंड किये।फिर कोचिंग गए।”
“क्या स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं थी?”
“पता नही। स्कूल तो हाजिरी के लिए और टेन प्लस टू क्लियर करने जाते थे।सबने बता दिया था कि स्कूल की पढ़ाई बेकार है। कोचिंग में धुंआधार MCQ कराये जाते थे।घर पर भी रात भर वही। अलग अलग गाइड से।”
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“सभी ने सच कहा था । फर्स्ट एटेम्पट में निकल गए MBBS में भर्ती हो गए।यहाँ भी फर्स्ट ईयर में सीनियर्स ने बता दिया कि MBBS से कुछ नही होता। PG मस्ट है। और PG करना है तो MCQ करने की प्रैक्टिस करते रहो।बस MCQ का अभ्यास तो था ही PRE PG की तैयारी चालू कर दी। MBBS की डिग्री तो बारहवीं की तरह अनिवार्य थी पर बाकी जीवन के लिए प्रैक्टिस के लिए बेकार।
Pre PG की कोचिंग में बहुत सब्जेक्ट होते हैं पर माहौल भी मस्त रहता है। कोचिंग भी जॉइन कर ली।
MBBS के पास होने के बाद इंटर्नशिप में तो सब दुनिया, भोजन पानी छोड़कर MCQ में लग गए।”
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“तो इंटर्नशिप में कुछ कम नही सीखे?”
“टाइम कहाँ था। चौबीसों घण्टे बस MCQ।पेशेंट देखते तो PRE PG कैसे क्लियर होती?”
“तो फिर PG में तो काम किया होगा? ”
“कहां सर, जितना जरूरत हुआ राउंड में बता दिया।कन्सल्टेंट ने जो बोला नर्सिंग स्टाफ को बता दिया।”
“खुद से अपने दम पर क्या कर लेते हो? क्या सीखा है?”
“सीखते तो फिर कोचिंग और MCQ कब करते?”
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“अब MCQ क्यों?”
“PG में आते ही सीनियर्स ने बता दिया। बिना सुपर स्पेशलायजेशनके सब बेकार है। सुपर हो जाओगे तो सैलरी डबल रहेगी।”
“तो फिर अभी क्या चल रहा है?”
“बस एक ही जादू है। जब तक सुपर में नही सेलेक्ट होते, तब तक तो MCQ ही करना है।”
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डॉक्टर साहब, ये MCQ आप कब तक करते रहेंगे? ”
“सर, उसका कोई टेंशन नही है। सुपर होने के बाद फिर फेलोशिप में फिर MCQ लगेंगे। अपनी मास्टरी है। ”
“बेटा, पेशेंट देखने कब चालू करोगे?”
“अभी क्या जल्दी है सर?”
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“सर आप हंस क्यों रहे हैं?”
“नहीं, मैं हंस तो बाहर से रहा हूं, पर अंदर से रो रहा हूँ।”
“क्यों सर,ऐसी क्या बात हो गयी जो आप अंदर और बाहर अलग अलग फीलिंग्स दे रहे हैं?”
“मैं सोच रहा हूँ कि आप किस दौड़ में चले गए? आप समुद्र नापना सीख रहे हैं पर समुद्र में नही जा रहे हैं।बिना पानी मे जाए कोई तैरना कैसे सीख सकता है।”
“सर, इसमे तो मेरी कोई चूक नहीं है। मै ने कहीं मेहनत में कमी नही आने दी।जैसा रास्ता है वैसे ही चला हूँ।”
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” आपका भविष्य क्या होगा? यह भी चिंता का विषय है।”
“उसमे कोई चिंता नही सर।सुपर होने के बाद कॉरपोरेट में अप्लाई कर दूंगा। वे मुझे नए ब्रांड की तरह पब्लिसिटी दिलवाएंगे।। मेरे दम पर उनका धंधा चमकेगा और मेरा भी। साल दो साल में कहीं और शिफ्ट हो जाऊंगा।फिर कहीं और।फिर काम समझने की परखने की समझ है कितने लोगों के पास? अधिकांश तो डिग्री और ब्रांड तक पढ़ने की समझ रखते हैं।”
” पर तब तक आप चालीस छूने लगोगे। फैमिली, पेरेंट्स का क्या करोगे? उम्र बढ़ने पर अकेलापन।”
“सर अभी तो सब कॅरिअर बनाने की बात ही करते हैं। आपने नई बात कर दी। पर अभी रहने दीजिये। अभी एक चैप्टर के MCQ कवर करने हैं।”
क्रमशः……………









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