इस अतिगंभीर व जघन्य घटना के सही एक साल बाद का परिदृश्य यह है कि अभी दो ड्रग इंस्पेक्टर को बहाल कर दिया गया,
डाक्टर की लिखी दवाओं को मरीज केमिस्ट से खरीदकर इलाज का इतिहास अभी का नहीं सैकड़ों साल का , यह घटना इस व्यवस्था में अविश्वास को खत्म करता है l कलंकित करने वाली अति दुखद और निर्मम घटना जिसमें 26 बच्चों की किडनी फेल तब हुई जब उन्हें डाक्टर द्वारा परामर्श दिए कफ सिरप दिया गया l उनकी दुखद मौत हो गई , उस में ही कार्यवाही और जांच के नाम पर हर नागरिक से जो धोखा हुआ है वो माफ़ करने लायक नहीं है,
यह केस शीशे की तरह पहले दिन से ही साफ था ,
बच्चों को कोल्ड्रिफ नामक कफ सिरप जो बाकायदा निम्न सिस्टम से खुदरा केमिस्ट तक पारसिया जिला छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश में बिकने पहुंचा , उसकी कड़ियाँ
निर्माता – जो मूलभूत पदार्थों से दवा बनाता है – गुणवत्ता की जांच – हर बैच की दवा को बाजार में जाने की अनुमति – वितरण – सरकारी अस्पताल – डिस्पेंसरी – खुदरा दवा विक्रेता
बिना हानिकारक पदार्थों के सुरक्षित वितरण
दवा बनने वाली कंपनी को लाइसेंस , उसकी बनाई दवा की गुणवत्ता और सुरक्षित करना, इन दवाओं की लैबोरेटरी में जांच करना , ड्रग इंस्पेक्टर की इंस्पेक्शन रिपोर्ट
यह FDA मध्य प्रदेश , जो स्वास्थ्य मंत्रालय मध्य प्रदेश शासन के अंतर्गत है , इसकी पूरी जिम्मेवारी इस तंत्र की है l गुणवत्ता की छोड़ भी दें तो भी कम से कोई विषैला पदार्थ संक्रमण तो दवाओं में न हो इसकी जिम्मेवारी तो FDA की है इससे कोई कैसे झुठला सकता हैं
पृष्ठभूमि
डॉ प्रवीण सोनी जो क्वालिफाइड पीड़िट्रिशियन हैं उन्होंने बिना स्वप्न में भी, यह सोचे कि कभी ऐसा होगा, कि एक कफ सिरप जिसकी मूलभूत दवा को वो अपने करियर के 35 साल से लिख रहे हैं उस ही ,सिरप में जानलेवा पदार्थ डायथिलीन ग्लाइकोल, वो भी मेडिकल ग्रेड की जगह इंडस्ट्री ग्रेड का , मान्य सुरक्षित मानकों से 500 गुना ज्यादा मिला निकल सकता है , उसकी गुणवत्ता चेक करने वाले आंख मूंद रिपोर्ट में सब सही है, साइन क्यों करते रहे हैं, उससे 26 बच्चों की मौत हो जाएगी पर इसका खामियाजा प्रशासन ने डाक्टरों में मत्थे मढ़ दिया
कार्यवाही
उन दिनों के अखबारों मीडिया मैं यह मामला तूल पकड़ गया और मीडिया राजनीति की चूल्हे हिलने लगीं तब प्रशासन ने रातों रात पारसिया से तीन डाक्टरों को जेल में ठूंस दिया , और यह इल्ज़ाम डाक्टरों पर डाला , की डाक्टरों सिरप में मिलावट की जानकारी होने बावजूद दवा लिखने का क्रिमनल कृत्य किया ( उनको बताना चाहिए कि दवा जांच की लैबोरेटरी क्या डाक्टर के यहां होती है ), फैक्ट्री जो दक्षिण में थी उसके मालिक को गिरफ्तार किया कफ सिरप को बरामद किया और लैबोरेटरी में डाइथिलीन ग्लूलीकॉल सुरक्षित मात्रा से 500 गुना पाया गया , यह केस शीशे की तरह साफ था , फैक्ट्री मालिक ने विशुद्ध लाभ के लिए दूषित पदार्थ का घोल बनाया , और उसकी उत्पादन यूनिट जिसे FDA यानी सरकारी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की मिली भगत से को अमानक ही नहीं विषाक्त दवा को बनाने की अनुमति मिली.
केवल और केवल कुछ लोगों को बचाने जो सरकार की जांच एजेंसी है, केस को ऐसे भटकाया गया कि डाक्टर जैसे खुद दवा अपने घर में बना रहे हों, उनके पास इस बात का क्या सबूत था कि डाक्टर को सिरप विषाक्त होने की जानकारी थी , यह आज तक कहीं जांच वालों ने नहीं बताया , बजाय जिनकी जिम्मेवारी थी और FDA तीन लोग जेल में होते, तीन डाक्टर को जाल में फंसा कर जेल में डाला, सरकार ने अपने अधीन एजेंसी को बचाया, दिखावे को ड्रग इंस्पेक्टर निलंबित किए विभागीय जांच और उस पर उनका बहाल होना, क्या फिर एक नया छिंदवाड़ा को होने की बाट जोह रहा है यह सूबा, प्रशासन को फॉर्मूला मिल गया है, दवा से मौतें तो इतने लचर भ्रष्ट FDA जांच एजेंसी होते होती ही रहेगी l जब जांच एजेंसी को इतने जघन्य अपराध में मुक्त किया जा रहा है तो यह संभावना बढ़ रही है l बलि चढ़ाने को डाक्टर मिल ही रहे हैं कल फिर यही होगा
ये डाक्टर सड़क पर उतरने से डरते हैं, इनकी जरा सी प्रशासन की धमकी से घिग्घी बांध जाती है, ये बिना प्रदर्शन रोड पर धरना के मरीज के इलाज अपनी आजीविका कमाने से मतलब रखते है, इन्हें बेक़सूर होने पर सालों जेल में डाले रक्खे जाने से सड़कों पर नारे नहीं लगते, टी वी पर बहसें नहीं होती अखबार शांत रहते है
छिंदवाड़ा के 26 बच्चों उनके अभिभावकों के सामने हम डाक्टर शर्मिंदा है तीन डाक्टर एक वर्ष जेल में है पर आपके मुजरिम बाहर हैं
हम खुद इस माहौल में दवा लिखने से ही इतने भयभीत है कि कब किस दवा में कोई विष से भी घनघोर पदार्थ हो और वो दवा FDA जांच की पूरी निकम्मी मशीनरी को पार कर आपके हाथों में पहुंचे और उसे लिखने का पाप मुझे मिले और मैं असमर्थ हूं कि दवा में मिलाये या मिलीभगत से मिलवाए जहर को पहचान सकूँ मेरे पास कोई लैबोरेटरी नहीं होती कि मैं हर दवा को चेक करूं, पूरी दुनिया में दवा की मिलावट में उन एजेंसी के लोग जेल जाते हैं जिनकी जिम्मेवारी लैबरेटरी चेक करने की है हमारे वतन में 3 डाक्टर एक साल से बिना किसी तरह का रोल इस दवा में मिले जहर के लिए जिम्मेवार होते, जेल में रखा जा सकता है, और एक साल के बाद के साल भी पता नहीं है
सहमत हों न हों पढ़ सकते है। विचार तो किया जा सकता है










