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अपने बच्चों को कुछ भी बना देना
यदि करते हो उन्हें थोड़ा भी प्यार,
गलती से उन्हें डॉक्टर मत बना देना
आज देश में चिकित्सा व्यवसाय की
विकट स्थिति है
आज डॉक्टर बनने के लिए नहीं
अनुकूल परिस्थिति है I
यदि गलती से बच्चे को
डॉक्टर बनने का जुनून चढ़ गया हो
पागलपन का यह भूत चढ़ गया हो
उसे ज़रूर किसी जानकार
चिकित्सक से मिला देना
अपने होनहार बच्चे की ….
लेकिन बलि मत चढ़ाना I
समाज सेवा का है यदि उस पर भूत
उसे नेता बना देना,
जितना पैसा उसकी पढ़ाई पर ख़र्च करोगे
उतने में नगर निगम का चुनाव लड़वा देना।
एक बार पार्षद बन गया तो
बेहतरीन तनख़्वाह पाएगा
एक बार जीत गया तो
जीवन भर पेन्शन पाएगा ।
यदि यह उसे नहीं भाता है तो
प्रशासनिक अधिकारी बना देना
जो बच्चा बन सकता है डॉक्टर
उसके लिए नहीं मुश्किल ,
कोई परीक्षा देना ।
अधिकारी बनते ही
जिले का राजा होगा
जिले का सबसे वरिष्ठ चिकित्सक भी
उसके आगे नतमस्तक होगा ।
अपने बच्चे को चाहे
भूखे शेर के आगे छोड़ देना
हिंदुस्तान में लेकिन ,
डॉक्टर मत बनने देना ।
पैसा कमाने का हो शौक़ तो
वकील बना देना
वकील की है शख़्सियत ऐसी
कोई पंगे नहीं लेना चाहता
चोटी के वकील से तो
यमराज भी घबराता ।
यदि बन गया चोटी का डॉक्टर
तब भी मूँगफली ही खानी पड़ेगी
जो माँगी ज़्यादा फ़ीस ,
गिन- गिन कर गाली पड़ेंगी ।
जो बन गया वकील वो ऊँचा
नेता भी घबराएंगे
जब फँसेंगे गले में फंदे
नेता हो या अधिकारी
सब आगे पीछे चक्कर लगाएंगे I
कोई उसे नहीं जल्लाद कहेगा
TV ऐंकर भी फ़रियाद करेगा
कोई मुफ्तखोरी न करेगा
फ़ीस देने में सीनाजोरी न करेगा ।
बच्चा बहादुर है तो उसे सेना में भेजना
कदापि डॉक्टर न बनने देना ।
आज चिकित्सा बेहद
ख़तरनाक व्यवसाय है
सरकारें हैं अंधी,
इसलिए नहीं दिखता कोई उपाय है ।
अंधे क़ानून हैं , अंधा न्याय है ।
हर इज़्ज़तदार इंसान कोर्ट, कचहरी,
पुलिस से दूर रहना चाहता है
अपनी रोजी इज़्ज़त से कमाना चाहता है
अब चिकित्सा व्यवसाय
इज़्ज़तदारों के लिए नहीं ठीक है,
आज जेल, जुर्माना, हड्डी तुड़ाना ,
सब डॉक्टर के बहुत क़रीब हैं ।
क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट ,
पी एन डी टी एक्ट
अफस्पा से भी खतरनाक हैं
छोटी सी प्रशासनिक गलती पर
भारी जुर्माने और
जेल तक का प्रावधान है।
आजीविका कमाने के और भी
इज़्ज़तदार, साधन और समाधान हैं
चिकित्सकों के लिए नहीं देश में ,
न्याय संगत विधान है।
आप अपनी संतान को बहुत चाहते हैं
उसे समाज में इज़्ज़तदार
इंसान देखना चाहते हैं
उसे फिर मौत का, सौदागर मत बनाना
किसी क़ीमत पर, डॉक्टर न बनने देना।
लम्बी शिक्षा , कठिन परीक्षा ,
मांगो अधिकार ,
तो सब को आता है गुस्सा
यही है आज देश में ,
चिकित्सा व्यवसाय का क़िस्सा ।
यदि आप अपने बच्चे को
डिप्रेशन में नहीं देखना चाहते हो
अपनी ज़िन्दगी भर की कमाई ,
किसी नाख़ुश मरीज़ से,
अदालती जद्दोजहद में ,
नहीं दाव पर लगाना चाहते हो
चाहे अपने बच्चे को
पान की दुकान खुलवा देना,
हिंदुस्तान में, डॉक्टर मत बनने देना ।
पैसा हर कोई कमाना चाहता है
पर डॉक्टर मांगे फीस तो,
यह किसी को नहीं भाता है।
आपात काल में हुए खर्चे की भी
न कोई , सरकारी जिम्मेदारी है
डॉक्टर से हो जाए गलती तो ,
कीमत चुकानी भारी है।
कहाँ से तुम्हारा बच्चा
इंसानों की क़ीमत चुकाएगा
फ़ीस माँगेगा तो कसाई ,
न लेगा तो
अदालतों के ख़र्चे कैसे उठाएगा ।
अपने बच्चे को चाहे कुछ भी बना देना,
हिंदुस्तान में, डॉक्टर मत बनने देना ।
हाँ कुछ पैसा ज़रूर जोड़ लेना
विदेश में जाकर करा सको इलाज
ख़ुद को ज़रूर इस क़ाबिल बना लेना
कल हिंदुस्तान में नेता होंगे ,
वकील होंगे, लेकिन डॉक्टर न होंगे
अदालतें होंगी, लेकिन अस्पताल न होंगे ।
क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट होगा
लेकिन पड़ोस का डॉक्टर चाचा न होगा ।
डॉ. चन्दर प्रकाश खण्डेलवाल
१३/०३/२०१६
कृपया कविता के मूलरूप से बिना छेड़खानी के share करें । 🙏









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