Tele medicine

रजज री स.ं डी.एल.-33004/99

REGD. NO. D. L.-33004/99

स.ं 174] No. 174]

ऄसाधारण

EXTRAORDINARY भाग III—ख ड 4 PART III—Section 4

ाजधकार से काजित

PUBLISHED BY AUTHORITY

नइ दद ली, बहृ पजतिार, मइ 14, 2020/ििै ाख 24, 1942
NEW DELHI, THURSDAY, MAY 14, 2020/VAISAKHA 24, 1942

भारतीय अय ु ि ान पररषद् के ऄजध मण म िासी बोडड ऄजधसचू ना

नइ दद ली, 12 मइ, 2020

स.ं भा.अ.प.-211(2)/2019(नजै तकता)/100659.—भारतीय अयु ि ान पररषद् ऄजधजनयम, 1956 (1956 का

सी.जी.-डी.एल.-अ.-14052020-219374

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CG-DL-E-14052020-219374

102) की धारा 33 ारा द िजोयक का आ तेमाल करते ए, भारतीय अयु ि ान पररषद् के ऄजध मण म िासी बोड,ड के र सरकार की पूिड िीकृजत से, “भारतीय अयु ि ान पररषद् ( ािसाजयक अचरण, जि ाचार एिं नैजतकता) जिजनयमािली, 2002 को संिोजधत करने के जलए एतद ारा जन जलजखत जिजनयम बनाता है :-

1. (i) ये जिजनयम, “भारतीय अयु ि ान पररषद् ( ािसाजयक अचरण, जि ाचार एिं नैजतकता) (संिोधन) जिजनयमािली, 2020” कहे जाएग ।

(ii) ये जिजनयम 25 माच,ड 2020 से लागू माने जाएंग , जजस ददनांक को के र सरकार ने आन जिजनयमक के जलए ऄनुमोदन दान दकया था।

2. “भारतीय भायु ि ान पररषद् ( िसाजयक अचरण, जि ाचार एिं नैजतकता) जिजनयमािली, 2002” म जन जलजखत जोडा जाएगा:-

3.8 टेलीमजे डजसन ारा परामिड
3.8.1 पररजि -5 म ददए गए टेलीमेजडजसन ैजटटस् ददिाजनदेिक के ऄनुसार भारतीय अयु ि ान पररषद् ऄजधजनयम,

1956केऄतंगतडपंजीकृतजचदक सा िसाजययक ाराटेलीमजेडजसनकेजररएपरामिडकीऄनुमजतहोगी।

2020 GI/2020 (1)

2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

3.8.2 टेलीमेजडजसन ैजटटस् ददिाजनदेि, िा ्य सेिा म िृजि करने और भारत म सभी तक प च ाने के जलए टेलीमेजडजसन को भािी ढंग से सहारा देने म पंजीकृ त जचदक सा िसाजययक को समथड बनाने के जलए सहायता और साधन के पम कामम लानेहतेुतैयारदकएगएह।

3.8.3 टेलीमेजडजसन ैजटटस् ददिाजनदेि, दरू से ि यजचदक सीय या अ ामक द या करने के जलए जडजीटल ौ ोजगकी के आ तेमाल पर लागू नह हकगे।

3.8.4 टेलीमेजडजसन ैजटटस् ददिाजनदेिक म दी गइ औषध सूजचयक म से कोइ भी सूची, अि यकता ऄनुसार, समय-समय पर, भारतीय अयु ि ान पररषद् के ऄजध मण म िासी बोडड/ भारतीय अयु ि ान पररषद् ारा अिोजधत की जा सकती ह।ै

3.8.5 भारतीय अयु ि ान पररषद् के ऄजध मण म िासी बोडड, अि यकता ऄनुसार आस संबंध म अि यक जनदेि या परामिड या प ीकरण जारी कर सकता ह।ै

3.8.6 ये टेलीमेजडजसन ैजटटस् ददिाजनदेि, के र सरकार ( िा ्य एिं पररिार क याण मं ालय, भारत सरकार) के पिू ड ऄनुमोदन से िृहत् लोक जहत म समय-समय पर संिोजधत दकए जा सकते ह।

डॉ.अर.के.ि स, महासजचि [ जि ापन III/4/ऄसा./25/2020-21]

पाद रट पणी: धान जिजनयमािली नामतः “भारतीय अयु ि ान पररषद् ( ािसाजयक अचरण, जि ाचार एिं नैजतकता) जिजनयमािली, 2002” 6 ऄ लै , 2002 को भारत के राजप के भाग-III, खडं (4) म काजित की गइ थी और भारतीय अयु ि ान पररषद् की ददनांक 22/02/2003, 26/05/2004, 10/12/2009, 28/01/2016, 21/09/2016 और 01/03/2019 की ऄजधसूचना के ऄंतगडत संिोजधत की गइ थी।

पररजि – 5

भारतीय अय ु ि ान पररषद् के ऄजध मण म िासी बोडड

टेलीमजेडजसन जैटटसददिाजनदिे

 

टेलीमेजडजसन का आ तेमाल करके िा ्य सुर ा दान करने म पंजीकृ त जचदक सा िसाजययक के जलए समथडकारी।

  

ये ददिाजनदिे नीजत अयोग की समभाजगतासेतयै ारदकएगएह।

[आसे भारतीय अयु ि ान पररषद् ( ािसाजयक अचरण, जि ाचार एिं नैजतकता) जिजनयमािली, 2002 का पररजि -5 बनाया गया ह।ै ]

25माच,ड 2020

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 3 टेलीमजे डजसन

“जहां दरू ी एक मह िपणू ड कारक ह,ै ऐसी ज थजत म बीमारी और चोटक के जनदान, आलाज और रोकथाम, ऄनसु धं ान और म ू यांकन केजलएिधैसचूनाकेअदान- दानहतेुऔर जोयकतथाईनकेसमदुायकके िा ्यकोबढािादनेेकेसम जहतम िा ्य सरु ा दाता की जि ा जारी रखने हते ु सचू ना और ससं चू न ौ ोजगदकयक का आ तमे ाल करके सभी िा ्य सरु ा िसायजिदक ारा िा ्यसरु ासिेा की दायगी।”

टेली िा ्य

“दरू सचं ार और जडजीटल ससं चू न ौ ोजगदकयक के मा यम से जचदक सा दखे भाल, दाता और मरीज जि ा, िा ्य सचू ना सिे ा और ि सरु ा सजहत िा ्य और िा ्य सबं धं ी सिे ा की दायगी और सजु िधाकरण”

पजं ीकृतजचदक सा िसायी

“कोइ पजं ीकृ त जचदक सा िसायी एक ऐसा जो ह,ै जो भारतीय अय ु ि ान पररषद् ऄजधजनयम, 1956 के ऄतं गतड रा य मजे डकल रजज टर या भारतीय मजे डकल रजज टर म नामादं कत ह।ै ”

 

4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

पृ भूजम

टेलीमजे डजसन : िा ्य सरु ा ाजि और खच-ड िहन मता की समथकड ारी

टेलीमेजडजसन के ऄनेक लाभ ह। यह ती तर ाजि और ऐसी सेिा की ाजि जो संभितः ऄ यथा ईपल ध न हक, सजहत समुजचत ह त ेपक की समय से ाजि म िृजि करती ह।ै

भारतम जोगत िा ्यसुर ाईपल धकरानाएकचनुौतीह,ैजििेष पसेबडीभौगोजलकदरूरयकऔरसीजमत संसाधनक के होते ए। टेलीमेजडजसन के मुख लाभक म से एक लाभ, लागत और यास की बचत हो सकता ह,ै जििेष प से ामीण मरीजक की, टयोदक परामिड और आलाज ाि करने के जलए ई ह लंबी दरू ी तय करने की अि यकता नह ह।ै आस कार के पररद ृ य म टेलीमेजडजसन, केिल समय से आलाज ईपल ध कराने म ही नह बज क ती तर आलाज ाजि म एक आ तम समाधान ईपल ध करा सकती ह।ै यह या ा से संबंजधत जि ीय लागत भी कम करेगी। यह पररिार और देखभाल करने िाले जोयक तथा सामाजजक कारकक को होने िाली ऄसुजिधा / ईन पर पडने िाले भाि को भी कम करेगी। टेलीमेजडजसन ऐसे मामलक म जििेष प से एक मह िपूणड भूजमका जनभा सकती ह,ै जहां मरीज को भौजतक प से पंजीकृत जचदक सा िसायी (या ऄ य जचदक सा िसायजिद)् से जमलने की अि यकता नह है ऄथाडत जनयजमत, नै यक जांच या जनरंतर मॉनीटररग के जलए टेलीमेजडजसन ज तीयक ऄ पतालक पर पडने िाला भार कम कर सकती ह।ै

टेलीमेजडजसन के साथ, ररकाडड के रखरखाि और द तािेजीकरण की ऄजधक संभािना ह,ै आसजलए यह डॉटटर और ऄ य िा ्य सुर ा टाफ से सलाह ाि न होने की संभािना को यूनतम करती ह।ै जिपररततः डॉटटर के पास, टेली-परामिड के जररए ईपल ध कराइ गइ सलाह का सही-सही द तािेज होता ह।ै जलजखत द तािेजीकरण, दोनक प कारक के जिजधक संर ण म िृजि करता ह।ै टेलीमेजडजसन, मरीज की सुर ा और िा ्य क मयक की सुर ा ईपल ध कराती ह,ै जििेष प से ऐसी ज थजतयक म जहां सासं गक स ं मणक का खतरा हो। ऐसी ऄनके ौ ोजगदकयां ह, जजनका ईपयोग टेलीमेजडजसन म दकया जा सकता ह,ै जो ऄपने जचदक सन ्याप्य का बेहतर ढंग से पालन करने और ऄपनी बीमाररयक का बेहतर ढंग से बंधन करने म मरीजक की सहायता कर सकती ह। टेलीमेजडजसन, रो चाप, रो िकडरा बंधन अदद जैसे जचदक सीय ईपकरणक की सहायता से, जचदक सक को ईपल ध मरीज के मह िपूणड पैरामीटरक की ईपल धता को भी समथड बनाती ह।ै

अपदाएं और महामाररयां, िा ्य सुर ा दान करने के जत ऄनुठी चनु ौजतयां ई प करती ह। हालांदक टेलीमेजडजसन, ईन सभी का हल नह जनकालेगी परंतु यह ऐसे ररद ृ यक के जलए ब त ईपयुो ह,ै जजनम जचदक सा िसायी, मरीजक का मू यांकन और बंधन कर सकते ह। ऐसे कोप के समय म टाफ को िायरस/सं मणक के खतरे म डाले जबना टेलीमेजडजसन जिजजट दकए जा सकते ह। टेलीमेजडजसन ैजटटस, िा ्य सुर ा क मयक और मरीजक दोनक को होने िाले खतरे कम कर के सं ामक रोगक के संचारण की रोकथाम कर सकती ह।ै टेलीमेजडजसन का आ तेमाल करके, िा ्य सुर ा की दायगी म िाजमल लोगक के ऄनाि यक और ऄपररहायड खतरे से बचा जा सकता है और मरीजक की दरू से ही ीननग की जा सकती ह।ै यह, ऐसे जचदक सा िसाजययक को ती प च ईपल ध करा सकती है जो संभितः जोगत प से त काल ईपल ध न हक। आसके ऄलािा, यह संबंजधत िा ्य सं थानक पर भौजतक देखभाल ईपल ध कराने के जलए ऄजतररो जो ईपल ध कराती ह।ै आस कार िा ्य णाजलया , जो टेलीमेजडजसन म जत ाजपत की गइ ह, िे यह सुजनजित करने के जलए सु थाजपत ह दक कोजिड-19 जैसे कार के मु क िाले मरीजक को ऐसी देखभाल ाि हो, जजनकी ई ह अि यकता ह।ै

सरकार,सभीकोई गणुि ािालीदेखभालकीसमानप च ईपल धकरानेकेजलए जतबिहैऔर िा ्य णालीके सम पांतरण के जलए जडजीटल िा ्य एक मह िपूणड समथडकारी ह।ै आसजलए िा ्य णाजलयक म टेलीमेजडजसन को मु य धारा म लाना, प च के जत ऄसमानता और ऄिरोधक को यूनतम करेगा। भारत की जडजीटल िा ्य नीजत, िा ्य सुर ा णाली की द ता और पररणाम म सुधार करने के जलए जडजीटल साधनक के ईपयोग की िकॉलत करती है और टेलीमेजडजसन सेिा के ईपयोग पर मह िपूणड यान केज रत करती ह,ै जििेष प से ास ट तर पर ज थत िा ्य और अरो य के रक म , जजनम समय से और सिो म संभि देखभाल ईपल ध कराने म म यम तरीय सेिा दाता / िा ्य कमी, मरीजक को ौ ोजगकी मंचक के जररए डॉटटरक के साथ जोड सकते ह।

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 5

 

तथाजप, टेलीमेजडजसन की ैजटटस पर नचता रही ह।ै प ददिाजनदेिक के ऄभाि ने, पंजीकृत जचदक सा िसाजययक के जलए काफी संदद धता ई प की ह,ै जजससे टेलीमेजडजसन की ैजटटस पर संदेह ई प ए ह । माननीय बंबइ ई यायालय के 2018 के जनणडय न,े टेलीमेजडजसन के थान और िैधता के बारे म ऄजनजितता ई प कर दी थी टयकदक कोइ समुजचत ढांचा मौजूद नह ह।ै

भारत म ऄब तक िीजडयो, फोन, इटरनेट अधाररत मंचक (िबै /चैट/ए स अदद) के जररए टेलीमेजडजसन की ैजटटस पर कोइ कानून या ददिाजनदेि नह था। भारतीय अयु ि ान पररषद् ऄजधजनयम, 1956, भारतीय अयु ि ान पररषद् ( ािसाजयक अचरण, जि ाचार एिं नैजतकता) जिजनयमािली, 2002, औषध एिं ऄगं राग ऄजधजनयम, 1940 और जनयमािली, 1945, नैदाजनक थापना (पंजीकरण एिं जिजनयमन) ऄजधजनयम, 2010, सूचना ौ ोजगकी ऄजधजनयम, 2000 और सूचना ौ ोजगकी(तकडसंगतसुर ापिजतयांऔर द याएंएिंसंिदेनिील जोगतअंकडेयासूचना)जनयमािली,2011के ऄंतगतड मौजूदा ईपबंध ाथजमक प से मेजडजसन की ैजटटस और सूचना ौ ोजगकी को जिजनयजमत करते ह। कानून और जनयमक की ऄजनजितता म ऄंतराल, डॉटटर और ईनके मरीजक दोनक के जलए खतरा ई प करता ह।ै

कु छ ऐसे देि ह,ै जज हकने जिधायी ईपाय लागू दकए ह और कु छ ऐसे देि ह, जो गरै -जिधायी ईपायक का पालन करते ह जैसे टेलीमेजडजसन ैजटटस के ददिाजनदेि। कुछ देिक म ददिाजनदेिक को ऐसे ािसाजयक मापदंड माना जाता ह,ै जजनका जचदक सा ािसाजययक ारा पालन दकया जाना अि यक ह,ै हमने आन ऄ य ददिाजनदेिक की समी ा की है और जचदक सा िसाजययककोटेलीमेजडजसनम ैजटटसकरनेम समथडबनानेकेजलएआनददिाजनदिेककोएकसाथलानेकेजलएपरामिड दकया ह।ै

टेलीमेजडजसन म गजत जारी रहगे ी और जिजभ ापक पक म ऄजधक िा ्य देखभाल िसाजययक और मरीजक ारा आसे ऄपनाया जाएगा तथा ये ैजटटस ददिाजनदेि, आसकी गजत को बढािा देने म मुख समथडकारी साजबत हकगे।

ई े य

आनददिाजनदिेककाई े यडाटटरकको ािहाररकसलाहदेनाहैतादकसामा य ैजटटसकेएकभागके पम टेलीमेजडजसन के आ तेमाल पर जिचार करने के जलए डाटटरक और िा ्य क मयक ारा आ तमे ाल दकए जाने िाले देखभाल के सभी मॉडल और सभी सेिा को बढािा ददया जा सके। ये ददिाजनदेि, मरीज और सेिा दाता की सरु ा सुजनजित करने के जलए ितडमान सूचना, ईपल ध संसाधनक और मरीजक की अि यकता पर अधाररत भािी और सुरज त जचदक सा देखभाल ईपल ध कराने के जलए एक सुदढृ कारिाइ अगे बढाने म जचदक सा िसाजययक की सहायता कर गे

येटेलीमेजडजसनददिाजनदिे, िा थयसुर ा दायगीकेजलए ौ ोजगकीम आन गजतयककीपूणडसंभािनाकोकायडम पररणत करने म सहायता कर गे। ये, जचदक सक-मरीज संबंध; दाजय ि और लापरिाही; मू यांकन; बंधन और आलाज; संसूजचत सहमजत, देखभाल की जनरंतरता; अपातकाजलक सेिा के जलए रेफरलक; मेजडकल ररकाड ; मरीज के ररकाड की गोपनीयता और सरु ा और सूचना के अदान- दान; ै ाआनबग और जतपू त; िा ्य जि ा और परामिड के मु क से संबंजधतमापदंडऔरसलं ेखईपल धकरातेह।

ये ददिाजनदेि, जचदक सा िसाजययक को ईपल ध ौ ोजगकी मंचक और साधनक पर सूचना और िा ्य सुर ा दायगी ईपल ध कराने के जलए आन ौ ोजगदकयक को एकीकृत करने के तरीकक सजहत टेलीमेजडजसन के जिजभ पहल ु पर सूचना ईपल धकरातेह। आनम ,देखभालकी ि थाकेजलएऄ यनदैाजनकमानकक,संल खक,नीजतयकऔर द या केसंयोजनम िाणी, अंकडक, त िीरक और सूचना के सं ेषण और ौ ोजगकी को आ तेमाल करने के तरीकक का भी िणडन दकया गया ह।ै जहां नैदाजनक प से ईपयोु ह,ै ऐसी ज थजत म टेलीमेजडजसन मरीज की देखभाल म सहायता करने के जलए एक सुरज त, भािी और मह िपूणड पा मकता ह।ै

दकसी ऄ य ौ ोजगकी की तरह, टेलीमेजडजसन सेिा के जलए आ तेमाल की जाने िाली ौ ोजगकी का द ु पयोग दकया जा सकता ह।ै आसके कुछ खतरे, कजमयां और सीमाएं ह जज ह समुजचत जि ण, मानकक, संलेखक और ददिाजनदेिक के ितनड के जररए कम दकया जा सकता ह।ै

आनददिाजनदेिककाआ तेमाल,ऄ यरा ीयनदैाजनकमानकक,संलेखक,नीजतयकऔर द या केसंयोजनम दकयाजाना चाजहए।

6 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

1. टेलीमेजडजसन : पररभाषाएं और ऄन ु योग

1.1. पररभाषाएं

. 1.1.1.  टेलीमजे डजसन की पररभाषा
जि िा ्य संगठन, टेलीमेजडजसन को जन जलजखत प म पररभाजषत करता है :-
“जहां दरू ी एक मह िपूणड कारक ह,ै ऐसी ज थजत म बीमारी और चोटक के जनदान, आलाज और रोकथाम, ऄनुसंधान औरमू यांकनकेजलएिैधसचूनाकेअदान- दानहतेुऔर जोयकतथाईनकेसमुदायकके िा ्यकोबढािा देनेकेसम जहतम िा ्यसुर ा दाता कीजि ाजारीरखनेहतेुसूचनाऔरसंसूचन ौ ोजगदकयकका आ तेमाल करके सभी िा ्य सुर ा िसायजिदक ारा िा ्य सुर ा सेिा की दायगी।”

. 1.1.2.  टेली िा ्य की पररभाषा
एन इ जे एम के टेजल ट, टेली िा ्य को जन जलजखत प म पररभाजषत करता है :-
“दरू संचार और जडजीटल संसूचन ौ ोजगदकयक के मा यम से जचदक सा देखभाल, दाता और मरीज जि ा, िा ्य सूचना सेिा और ि सुर ा सजहत िा ्य और िा ्य संबंधी सेिा की दायगी और सुजिधाकरण”
अमतौर पर टेलीमेजडजसन का आ तेमाल, दकसी पंजीकृ त जचदक सा िसायी ारा दान की गइ नैदाजनक सेिा को द ित करता ह,ै जबदक टेली िा ्य, टेलीमेजडजसन सजहत िा ्य और िा ्य सबं ंधी सेिा के जलए ौ ोजगकी के आ तेमाल का एक ापक ऄथड िाला ि द ह।ै

. 1.1.3.  पजं ीकृ त जचदक सा िसायी (अर.एम.पी) की पररभाषा
आस द तािेज के ई े य के जलए, दकसी “पंजीकृत जचदक सा िसायी” को एक ऐसे जो के प म पररभाजषत दकयागयाहैजोभारतीयअयु ि ानपररषद्ऄजधजनयम,1956केऄतंगतड रा यमेजडकलरजज टरयाभारतीय मेजडकल रजज टर म नामांदकत ह।ै

1.2. दायरा

टेलीमेजडजसनके ापक जतमानकेऄंदर,येददिाजनदेि,भारतीयअयु ि ानपररषद्ऄजधजनयमकेऄतंगतड काजित दकए जाएंगे और ये केिल जििेष ऄजधकार ाि प च के जलए ही ह। ये ददिाजनदेि, िा ्य सुर ा सेिा म िृजि करने और सभी तक प च के जलए टेलीमेजडजसन को भािी ढंग से सहारा देने म पंजीकृ त जचदक सा िसाजययक को समथड बनाने के जलए सहायता और साधन के प म काम म लाने हते ु बनाए गए ह।

• ये ददिाजनदिे , भारतीय अयु ि ान ऄजधजनयम, 1956 के ऄंतगडत पंजीकृ त जचदक सा िसाजययक के जलए ह ।

• आनददिाजनदिेकम ,टेलीमजेडजसनकेजररएमरीजकसेपरामिडकरनेकेजलएपंजीकृतजचदक सा िसाजययककेमापदडं
और मानक किर दकए गए ह ।

• टेलीमेजडजसन म , मरीजक के साथ संसूचन के ऐसे सभी मा यम िाजमल ह, जो िाणी, ऑजडयो, मूल पाठ और जडजीटल अंकडक के अदान- दान सजहत सूचना ौ ोजगकी मंचक को सहारा दते े ह।
जििजनड
ये ददिाजनदेि, जिजि प से प तः जन जलजखत को जिि जत करते ह:ै –

• हाडडिेयर या सो टिेयर, ऄिसंरचना भिन और ऄनुर ण के जिजनदेिन।

• िाजमल अंकडा बंधन णाजलयां : मानक और ऄंतर- चालनीयता।

• दरू से ि यजचदक सीय या अ ामक द याएं करने की जडजीटल ौ ोजगकी का आ तेमाल।

• टेली िा ्य के ऄ य पहलू जैसे ऄनुसंधान और मू यांकन तथा िा ्य सुर ा क मयक की जनरंतर जि ा।

• आनम भारत के े ाजधकार से बाहर परामिड का कोइ ईपबंध नह ह ।

   

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 7

 

1.3. पजं ीकृतजचदक सा िसायी,टेलीमजेडजसनम जैटटसकरनेकेहकदारहै:ईनम सेसभीटेलीमजेडजसनकी जै टटस करने पर ऑनलाआन पा म परू ा कर गे

  

. 1.3.1.  कोइ पजं ीकृ त जचदक सा िसायी, भारत के दकसी भाग से मरीजक को टेलीमेजडजसन परामिड देने का हकदार ह।ै

. 1.3.2.  टेलीमेजडजसन का आ तेमाल करने िाले पंजीकृ त जचदक सा िसायी ई ह ािसाजयक और नजै तक मापदडं क और
मानकक को बनाए रखग े जो टेलीमेजडजसन की मूलभूत सीमा के ऄंदर परंपरागत जोगत दखे भाल पर लागू ह।

. 1.3.3.  ऐसे सभी पंजीकृत जचदक सा िसाजययक, जो टेलीमेजडजसन म ैजटटस करना चाहग े, को आन ददिाजनदेिक और टेलीमेजडजसन ैजटटस की द या और सीमा से ऄिगत कराने म समथड बनाने के जलए:
 एक ऑनलाआन कायड म भारतीय अयु ि ान पररषद् के ऄजध मण म िासी बोडड ारा तैयार दकया जाएगा और ईपल ध कराया जाएगा।
 ऑनलाआन परामिड दान करने के आ छुक सभी पंजीकृत जचदक सा िसाजययक को, आसकी ऄजधसूचना के तीन िषड के ऄंदर ऄजनिायड ऑनलाआन पा म पूरा करना अि यक ह।ै
 ऄंतररम ऄिजध म आन ददिाजनदिे क म ईज लजखत जसिांतक का पालन करना अि यक है।
 आसके पिात, टेलीमेजडजसन की जै टटस करने से पहले यथा जिजनधाडररत आस पा म म भाग लेना और ईसम ऄहतड ा
ाि करना ऄजनिायड होगा।

1.4. टेलीमजेडजसनकेऄन ुयोग

. 1.4.1.  टेलीमजे डजसन के जलए साधन
पंजीकृत जचदक सा िसायी, ौ ोजगकी अधाररत मरीज परामिड करने के जलए ईपयोु दकसी टेलीमेजडजसन साधन ऄथाडत टेलीफोन, िीजडयो, लैन, िैन, आंटरनेट, मोबाआल या ल डलाआन फोनक पर जडु े ईपकरणक, चैट मंचक जैसे हा सएप, फेसबुक, मेस जर अदद या टेलीमेजडजसन के जलए मोबाआल एप या आटरनेट अधाररत जडजजटल मंचो या काआप / इ-मेल /फै टस अदद जैसी अंकडा स ेषण णाजलयक का आ तेमाल कर सकते ह।
आ तेमाल दकए गए संसूचन के साधन चाहे कोइ भी हक, टेलीमेजडजसन ैजटटस के मुख जसिांत िही रहते ह।

. 1.4.2.  ससं चू न के तरीके , स जे षत सचू ना के समय, परामिड के ई े य और िाजमल दकए गए जोयक के बीच जिचार- जिमि,ड चाहेिेअरएमपीसेमरीज/देखभालकताडके बीचहोयाअरएमपीसेअरएमपीके बीच,के ऄनुसार
टेलीमेजडजसन ऄनु योगक को चार मलू कारक म िगीकृ त दकया जा सकता ह।ै
1.4.2.1 ससं चू न के तरीके के ऄनसु ार
 िीजडयो (टेलीमेजडजसन सुजिधा, ए स, चैट लेटफामो, काआप /फे स टाआम अदद पर िीजडयो)  ऑजडयो (फोन, िोअआप, ए स अदद)
 मूलपाठ अधाररत

o टेलीमेजडजसन चैट अधाररत ऄनु योग (जििेष ता ाि टेलीमेजडजसन माटडफोन ए स, िेबसाआट, ऄ य आंटरनेट अधाररत णाजलयां अदद)

o जनरल मेसेनजग / मूलपाठ / चैट लेटफामड ( हा सएप, गूगल, हग अईट, फे सबुक मेस जर अदद) o ऄसहकाजलक (इ-मेल / फै टस अदद)

1.4.2.2 स जे षत सचू ना के समय के ऄनसु ार

ससु गं त सचू ना का ऄसहकाजलक अदान- दान

जनदान, मेजडकेिन और िा ्य जि ा तथा टेक हो डरक के बीच, त िीरक, योगिाला ररपोट परामिड के जलए सुसंगत सूचना के अदान- दान के और/या जिदकरणीय जांच-पडतालक सजहत मरीजक

 

िा तजिक समय िीजडयो / ऑजडयो / टेट ट जिचार-जिमिड

    

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THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

जलए िीजडयो / ऑजडयो / टेट ट

1.4.2.3 परामिड के ई े य के ऄनसु ार

गैर-अपातकाजलक परामिड के जलए :-

मरीज, ऄपनी बीमारी के जनदान और आलाज के जलए या िा ्य जि ा और परामिड के जलए दकसी अर एम पी के साथ परामिड कर सकता ह।ै

की जिकायतक और ऄनुपरू क अंकडक के सारांि का स ेषण / ऐसे अंकडे दकसी जनजित समय पर जभ -जभ पा टयक को ऄ ेजषत दकए जा सकते ह और आसके पिात सुजिधा / अि यकता के ऄनुसार ाि दकए जा सकते ह।

ईसी अर एम पी के साथ ऄनिु तनड परामिड

मरीज, ईसी अर एम पी, जजसने जपछले जोगत परामिड म आलाज ज ाआब दकया था, के साथ, चल रहे ऄपने आलाज पर ऄनुितडन परामिड के जलए आस सेिा का ईपयोग कर सकते ह।

जनदान / आलाज / िा ्य जि ा / परामिड के जलए दकसी अर एम पी के साथ थम परामिड

    

तं काल सहायता या थमोपचार अदद के जलए अपात काजलक परामिड यददिैकज पकदखेभालमौजूदनह हैतोसमयसेदखेभालईपल धकरानेकेजलएटेलीपरामिडकेिलएकमा तरीकाहो

सकता ह।ै ऐसी ज थजतयक म अर एम पीज, ऄपने सिो म जनणडय के ऄनुसार परामिड ईपल ध करा सकते ह । तथाजप, अपातकाजलकदखेभालकेजलएटेलीमेजडजसनसेिा सेबचाजानाचाजहए,जबिैकज पक जोगतदखेभालईपल धहक और टेलीमेजडजसन परामिड केिल थमोपचार, ाणर ा ईपायक, रेफरल पर परामिड और सलाह तक ही सीजमत होनी चाजहए।

 अपातकाल के सभी मामलक म , मरीज को यथािी अर एम पी के साथ जोगत प से जिचार-जिमिड करने की सलाह दी जानी चाजहए।

1.4.2.4 िाजमल दकए गए जोयक के ऄनसु ार

मरीज से अर एम पी

टेलीमेजडजसन सेिाएं, मरीज को अर एम पी से जोड सकती ह।

दखे भालकताड से अर एम पी

टेलीमेजडजसन सेिाएं, ढांचे (भाग 4) म यथा ि णत कुछ ज थजतयक म देखभालकताड को अर.एम.पी से जोड सकती ह।

 

अर एम पी से अर एम पी   िा ्यकमी से अर एम पी

 

अर.एम पी, एक या एक से ऄजधक मरीजक की देखभाल के मु क पर या जानकारी साररत करने के जलए ऄ य अर एम पीज के साथ चचाड करने के जलए टेलीमेजडजसन सेिा का ईपयोग कर सकता ह।ै

कोइ िा ्य कमी1, दकसी अर एम पी के साथ दकसी मरीज के जलए परामिड स म सुजिधा दान कर सकता ह।ै ऐसा करने म िा ्यकमी, आजतिृ लेन,े मरीज की जांच करने और जन कषड संसूजचत करने म सहायता कर सकता ह।ै िे मरीज को अर एम पी ारा दी गइ सलाह को प / पुनबडजलत भी कर सकता ह।ै

1 नसड, संबि िा ्य िसायी, म य तरीय िा ्य दाता, ए एन एम. या दकसी समुजचत ाजधकारी ारा नाजमत कोइ ऄ य िा ्य कमी

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 9 2. आ तमे ालकीगइ ौ ोजगकीऔरससं चू नकातरीका

टेलीमेजडजसन परामिड दान करने के जलए ब ल ौ ोजगदकयक का आ तेमाल दकया जा सकता ह।ै ाथजमक प से तीन तरीके ह : िीजडयो, ऑजडयो या टेट ट (चैट, मैसेनजग, इ-मेल, फैटस अदद)। आन ौ ोजगकी णाजलयकम से यके कीऄपनी-ऄपनीिजोयां,कमजोररयांऔरसंदभडह, जजनम िेएकईजचतजनदान दान करने के जलए समुजचत या ऄपयाडि हो सकती ह ।

आसजलए जभ -जभ ौ ोजगदकयक की िजोयक, लाभक और सीमा को समझना मह िपूणड ह। मोटे तौर पर हालांदक टेलीमेजडजसन परामिड, अर एम पी को सासं गक ज थजतयक से सुर ा दान करता है परंतु यह भौजतक जांच को जत थाजपत नह कर सकती जजसके जलए पिड-परी ा, समाधान या िण-जनदान अि यकहोसकताह,ै जजसम िारीररक पिडऔरऄनुभजूतअि यकहोतीह।ै ऄपे ाकृतनइ ौ ोजगकी आस कमी म सुधार ला सकती ह।ै

ससं चू न के जिजभ तरीकक की िजोयां और सीमाएं

 

तरीका

िजोयां

  

सीमाएं

िीजडयो :

टेलीमेजडजसन सुजिधा, ए स, चैट लेटफाम फेस टाआम अदद पर िीजडयो

   जोगत परामिड, िा तजिक समय जिचार-जिमिड के जनकटतम।

  मरीज की पहचान ऄजधक असान ह।ै

  अरएमपी,मरीजकोदेखसकताहै और देखभालकताड के साथ चचाड कर
सकता ह।ै

  चा ुष संके त महसूस दकए जा सकते ह।

  मरीज का जनरी ण दकया जा सकता ह।ै

  दोनक जसरक पर ई गुणि ा िाले आंटरनेट कनेटिन पर जनभडर ह,ै ऄ यथा आसके पररणाम- ि प सूचना का ईप- आ तम अदान- दान होगा।

  चूंदक द ु पयोग की संभािना ह,ै आसजलए िीजडयो परामि,ड म मरीज की गोपनीयता सुजनजित करना ऄ यजधक मह िपूणड ह।ै

अजडयो :

फोन, िोअआप, ए स अदद

  सुजिधाजनक और तेज

  ऄसीजमत प च

  ता काजलक मामलक के जलए ईपयुो

  दकसी ऄलग ऄिसंरचना की
अि यकता नह

  गोपनीयता सुजनजित की जाती ह।ै

  िा तजिक समय जिचार-जिमिड

  गैर-मौजखक संकेत छूट सकते ह।

  ऐसी ज थजतयक के जलए ईपयुो नह , जजनम चा ुष जनरी ण (ऄथातड िचा, अंख या जीभ की जांच) या िारीररक
पिड अि यक ह।ै

  मरीज की पहचान, का ऄजधक प
होना अि यक ह,ै िा तजिक मरीज का जतजनजध ि करने िाले धोखबे ाज की ऄजधक संभािना ह।ै

टेट ट अधाररत :

जििेष ता िाला चैट अधाररत टेलीमेजडजसन माटड फोन ए स, एस एम एस िेबसाआट मेसेनजग णाजलयां ऄथाडत हा सएप, गूगल हग -अईट, फे स-बुक मेस जर

  सुजिधाजनक और ती

  द तािेजीकरण और पहचान, आस
लेटफामड की ऄजभ जििेषताएं हो
सकती ह।

  ता काजलक मामलक या ऄनुितडनक,
दसू री राय के जलए ईपयुो बिते दक अर एम पी के पास ऄ य ोतक से पयाडि संदभड हक।

  दकसी ऄलग ऄिसंरचना की अि यकता नह

  िा तजिक समय हो सकता ह।ै

  चा ुष और िारीररक पिड के ऄलािा, टेट ट अधाररत जिचार-जिमि म मौजखक संके त भी ाि नह होते।

  मरीज के साथ तालमले थाजपत करना करठन होता ह।ै

  डॉटटर या मरीज की पहचान सुजनजित नह हो सकती

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THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

ऄसमकाजलक :

इ-मेल,
फै टस, ररका डग अदद

  द तािेजीकरण करने म सुजिधाजनक और असान

  दकसी जिजि एप और डाईनलोड की अि यकता नह ह।ै

  त िीर , अंकडे, ररपोट , त काल साझा की जा सकती ह।ै

  ऄलग से दकसी ऄिसंरचना की अि यकता नह

  ऄजधक ईपयोगी, जब जांच ररपोट और ऄनुितडन तथा दसू री राय साथ हक।

  िा तजिक समय जिचार-जिमिड नह , आसजलए एक प ीय संदभड ईपल ध होता ह,ै एक मा मरीज ारा दकए गए ई ारण को अधार बनाया जाता ह।ै

  मरीज की पहचान के िल द तािेज अधाररत होती है और पुज करना करठन ह।ै

  गैर-मौजखक संके त ाि नह होते।

  जिलंब हो सकता है टयोदक डॉटटर
संभितः तुरंत मले न देख सके ।

1.

भारत म टेलीमजे डजसन के जलए ददिाजनदिे

सभी टेलीमजे डजसन परामि के जलए दकसी पजं ीकृ त जचदक सा िसायी का ािसाजयक जनणयड ही मागदड िी जसिातं

होना चाजहए : कोइ अर एम पी ही यह जनणडय लेने की सबसे ऄ छी ज थजत म होता है दक टया ौ ोजगकी अधाररत परामिड पयाडि है या जोगत समी ा की अि यकता ह।ै जचदक सा िसायी ईजचत जििेकाजधकार का आ तेमाल करेगा और देखभाल की गणु ि ा पर कोइ समझौता नह करेगा। कोइ टेलीमेजडजसन परामिड अरंभ करने से पहले सात कारकक पर जिचार दकया जाना अि यक ह।ै (पैनल देख )

1. संदभड

2. अर एम पी और मरीज की पहचान

3. संसूचन का तरीका

4. सहमजत

5. परामिड का कार

6. मरीज का मू यांकन

7. मरीज का बंधन

टेलीमजे डजसन, सदं भड के ऄनसु ार ईपयोु और पयािड होनी चाजहए

3.1

कोइ टेलीमजे डजसन अरंभ करने से पहले जिचार दकए जाने िाले सात कारक

    

3.1.1 यह जनणडय लेने के जलए दक टया एक ज थजत जििेष म टेलीमेजडजसन परामिड समुजचत है या मरीज के जहत म जोगतपरामिडअि यकह,ैपजंीकृतजचदक सा िसायीकोऄपने ािसाजयकजनणडयका आ तेमाल करना चाजहए। ई ह दकसी िा ्य जि ा या परामिड या जचदक सन का जिक प चुनने से पहले दकसी जनदान के जलए ईपल ध तरीके / ौ ोजगदकयक और ईनकी पयाडिता पर जिचार करना चाजहए। ई ह एक जनजित ज थजत का होजलज टक दजृ कोण ऄपनाने के पिात आस संबंध म तकड सगं त ढंग से जान लने ा चाजहए दक टेलीमेजडजसन मरीज के जहत म ह।ै

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 11

 

3.1.2 मरीज की िा ्य दिा की जरटलता

येक मरीज / मामला / मेजडकल दिा जभ हो सकती ह;ै ईदाहरण के जलए दकसी नये मरीज को एक साधारण जिकायत हो सकती है जैसे जसरदद,ड जबदक मधुमेह का कोइ ात मरीज, मधुमेह केटोएसीडोजसस जैसी अपातकाजलक ज थजतयक के साथ ऄनुितडन के जलए परामिड कर सकता ह।ै अर एम पी,दखेभालकािहीमानकबनाएरखेगाजो जोगतपरामिडम बनाएरखताह,ैपरंतुटेलीमेजडजसन की अंतररक सीमा के ऄंदर।

3.2 पजं ीकृ त जचदक सा िसायी और मरीज की पहचान अि यक है

3.2.1 टेलीमेजडजसन गुमनाम िाली नह होनी चाजहए: मरीज और अर एम पी दोनक को एक दसू रे की पहचान जानना अि यक ह।ै

3.2.2दकसीअरएमपीकोमरीजकीपहचान,नाम,अयु,पते,इ-मेलअइडी.,फोननबंर,पंजीकृतअइडी. या दकसी ऄ य पहचान, जो ईपयुो समझी जाए, ारा स याजपत करनी चाजहए और ईसकी पुज करनी चाजहए। अर एम पी को यह सुजनजित करना चाजहए दक अर एम पी के यायक और सपं कड योरे स याजपत करने के जलए दकसी मरीज हते ु एक तं मौजूद ह।ै

. 3.2.3  कोइ ैज िन जारी करने के जलए, अर एम पी को मरीज की अयु प तरीके से पूछना अि यक है और यदद कोइ संदहे है तो अयु का माण मांगे। जहां मरीज एक नाबाजलक ह,ै ऐसी ज थजत म , अयु की पुज करने के पिात टेली परामिड की ऄनुमजत केिल तभी दी जाएगी, यदद नाबाजलक ईस िय क जो के साथ परामिड ले रहा ह,ै जजसकी पहचान पता लगाइ जानी अि यक ह।ै

. 3.2.4  दकसी अर एम पी को ऄपने नाम और िैज क यो यता के बारे म मरीज को सूजचत करके परामिड अरंभ करना चाजहए।

. 3.2.5   येक अर एम पी, ज ज पिन पर, रा य अयु ि ान पररषद् / भारतीय अयु ि ान पररषद् ारा ईसे दान की गइ पंजीकरण सं या, िेबसाआट, आलेटराजनक संसूचन ( हा स एप/ इ-मेल अदद) द ित करेगा और ऄपने मरीज को रसीद अदद दगे ा।

3.3 टेलीमजे डजसन का तरीका

. 3.3.1  टेलीमेजडजसन परामिड दान करने के जलए ब त ौ ोजगदकयक का आ तेमाल दकया जा सकता ह।ै आन सभी ौ ोजगकी णाजलयककीऄपनी-ऄपनीिजोयां,कमजोररयांऔरसंदभडह, जजनम ईजचतदखेभाल दान करने की दजृ से िे समुजचत या ऄपयाडि हो सकती ह।

. 3.3.2   ाथजमक प से 3 तरीके ह : िीजडयो, ऑजडयो या टेट ट (चैट, त िीरे, मेसेनजग, इ-मेल, फैटस अदद)। अर एम पी ारा भाग 2 म ि णत ईनकी िजोयक, सीमा और ईपयुोता पर जिचार करना अि यक ह।ै

. 3.3.3  ऐसी ज थजतयां हो सकती ह, जहां जनदान तक प च ने और संदभड को बेहतर ढंग से समझने की दजृ से सूचना के ऄसहकाजलक अदान- दान की तुलना म िा तजिक समय परामिड िरीयता िाली हो सकती ह।ै आसी कार ऐसी ज थजतयां हकगी, जहां दकसी अर एम पी के जलए मरीज को बोलते ए सुनना अि यक होसकताहो,आसजलएदकसीजनदानकेजलएइ-मेलयाटेट टकीतुलनाम िाणीसबंंधीजिचार-जिमिड,

   

12

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

3.4

िरीयता िाला हो सकता ह।ै ऐसी ज थजतयां भी ह, जहां अर एम पी के जलए मरीज की चा ुष जांच करना और जनदान करना अि यक हो। दकसी ऐसे मामले म अर एम पी एक िीजडयो परामिड की जसफाररि कर सकता ह।ै ज थजत पर जिचार करते ए ऄपने सिो म जनणडय का आ तेमाल करते ए, कोइ अर एम पी, जनदान करने तथा आलाज करने के जलए आ तेमाल की जाने िाली सिो म ौ ोजगकी पर जनणडय ले सकता ह।ै

मरीज की सहमजत

 

दकसी टेलीमेजडजसन परामिड के जलए मरीज की सहमजत अि यक ह।ै यह सहमजत, जन जलजखत ज थजतयक पर जनभडर करते ए ऄंत नजहत या ऄजभ ो हो सकती है :
3.4.1 यदद मरीज, टेलीमेजडजसन परामिड ारंभ करता है तो यह सहमजत ऄतं नजहत2 ह।ै

3.4.2 मरीज की ऄजभ ो सहमजत अि यक होती ह,ै यदद :
कोइ िा ्यकमी, अर एम पी या कोइ दखे भालकताड टेलीमेजडजसन परामिड अरंभ करता ह।ै

3.4.3 कोइ ऄजभ ो सहमजत दकसी भी प म ररकाडड की जा सकती ह।ै मरीज एक इ-मेल, टेट ट या ऑजडयो/िीजडयो मेसेज भेज सकता ह।ै मरीज, अर एम पी को फोन/िीजडयो पर ऄपनी मंिा का ई लेख कर सकता ह।ै ऄथाडत (“हा , म टेलीमेजडजसन के जररए परामिड ाि करने की सहमजत दते ा/दते ी ू ” या कोइऐसासंसचूनसरलि दकम ददयाजासकताह।ै)अरएमपीकोऄपनेमरीजकेररकाडडम आसे दजड करना चाजहए।

3.5 मरीज के म ू याकं न के जलए सचू ना का अदान- दान

अर एम पी को कोइ ािसाजयक जनणडय लेने से पहले मरीज की दिा के बारे म पयािड मेजडकल सूचना ाि करने के सभी यास करने चाजहए।

3.5.1 मरीज की सचू ना

–  ईजचत नैदाजनक जनणडय का आ तेमाल करने म समथड होने के जलए ऄपेज त मरीज की सचू ना का कार और सीमा (आजतिृ / जांच जन कषड/ जांच ररपोट / जपछले ररकाडड अदद) ाि करने के जलए ऄपने ािसाजयक जििेकाजधकार का आ तेमाल करेगा।

–  यह सूचना, दकसी िा ्य सुर ा कमी/ सेिा दाता के साथ बातचीत के जररए और ौ ोजगकी अधाररत साधनक ारा सम थत दकसी सूचना ारा ऄनुपूररत की जा सकती ह।ै

–  यददअरएमपीयहमहसूसकरताहैदक ाि इसचू नाऄपयािड हैतोिहमरीजसेऄजतररोसूचनाका ऄनुरोध कर सकता ह।ै यह सूचना, आसके ि प के ऄनुसार िा तजिक समय म साझा की जा सकती है या बाद

2 ऄंत नजहत सहमजत : दकसी जोगत परामिड म यह मान जलया जाता है दक मरीज ने ऄपने िहार ारा परामिड की सहमजत दे दी है। जब मरीज ओपीडी म जाता है तो परामिड के जलए सहमजत ऄंत नजहत मानी जाती है। जोगत परामिड की तरह, ऄजधकांि टेलीपरामिो के जलए सहमजत ऄंत नजहत मान ली जाती है टयोदक मरीज ने परामिड अरंभ की है।

  

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 13

 

म इ-मेल / टेट ट के जररए साझा की जा सकती ह।ै ईदाहरण के जलए, कोइ अर एम पी, मरीज को दकसी योगिाला और / या रेजडयोलोजीकल जांचक की सलाह दे सकता ह।ै ऐसे मामलक म परामिड को, जिराम ज थजत म माना जाएगा और पनु ः जनधाडररत कायड म के समय पर पुनः अरंभ दकया जा सकता ह।ै कोइ अर एम पी, दकसी भी समय ईपयोु िा ्य जि ा ईपल ध करा सकता ह।ै

–  टेलीमेजडजसन के, पयाडि जांच के जलए सीमा के ऄपने ियं के सैट ह। यदद परामिड के जलए िारीररक जाचं एकमह िपणूडसचूनाहैतोअरएमपीको जोगतपरामिडकेजररएिारीररकजाचंकी ि थादकएजाने तक अगे कारडिाइ नह करनी चाजहए। अर एम पी के ािसाजयक जनणडय पर जनभडर करते ए, जब कभी अि यक हो, िह जन जलजखत की जसफाररि करेगा :

–  िीजडयो परामिड

–  ऄ य अर एम पी/ िा ्यकमी ारा जांच

–   जोगत परामिड

–  ईसके ािसाजयक ऄनुभि और जििेकाजधकार के अधार पर और पररभाजषत मानकक तथा मानक आलाज ददिाजनदिे क पर अधाररत जभ -जभ मेजडकल ज थजतयक के जलए ऄपेज त सूचना एक अर एम पी से दसू रे अर एम पी के जलए जभ हो सकती ह।ै

–  अर एम पी, जो ईपयुो हो, रोगी आजतिृ , जांच ररपोट , त िीरक अदद सजहत मरीज के सभी ररकाडड रखेगा।

3.6 परामिड के कार : पहला परामिड / ऄनिु ती परामिड

मरीज परामिड दो कार के होते ह नामतः पहला परामिड और ऄनुिती परामिड।

दकसी अर एम पी को संभितः पहली बार म टेली परामिड ाि करने िाले मरीज की केिल एक सीजमत समझबूझ हो जब पहले जोगत परामिड न अ हो। तथाजप, पहला परामिड, िीजडयो के जररए अ हो तो अर एम पी ऄजधक बेहतर जनणडय ले सकता है और आसजलए ऄजतररो दिाआयक, यदद जनद ित की गइ हो, सजहत बेहतर सलाह ईपल ध करा सकता ह।ै

दसू रीओरयददअरएमपी ारादकसीमरीजकोपहले जोगत पसेदखे जलयागयाहैतोयहसंभिहैदक मरीज का बंधन ऄजधक ापक बनाया जा सके।

3.6.1 पहले परामिड का ऄथड जन जलजखत है :

  मरीज, अर एम पी के साथ पहली बार परामिड कर रहा ह;ै या

  मरीज ने पहले अर एम पी के साथ परामिड दकया है परंतु जपछले परामिड से 6 महीने से ऄजधक बीत गए ह;ै या

  मरीज ने पहले अर एम पी के साथ परामिड दकया है परंतु दकसी जभ िा ्य दिा के जलए।

1.6.2 ऄनिु तीपरामिड(िक)काऄथडजन जलजखतह:ै
 मरीज ऄपने जपछले जोगत परामिड के 6 महीने के ऄंदर ईसी अर एम पी के साथ परामिड कर रहा है और

यह ईसी िा ्य दिा की देखभाल के म म ह।ै तथाजप आसे ऄनुिती परामिड नह माना जाएगा, यदद :

  कोइऐसेनयेसलं णह जोईसी िा ्यदिाके दायरेम नह ह और/या

  अर एम पी को जपछले आलाज और सलाह का संदभड याद नह ह।ै

 

14

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

3.7

3.7.1

मरीज बधं न: िा ्यजि ा,परामिडऔरजचदक सन

यदद दिा, परामिड के कार के अधार पर टेलीमेजडजसन के जररए समुजचत ढंग से जनयंज त की जा सकती है तो अर एम पी एक ािसाजयक जनणडय के साथ जन जलजखत के संबंध म अगे कारडिाइ कर सकता ह:ै

o आस मामले म यथा ईपयुो िा ्य जि ा ईपल ध कराना; और / या o जिजि नैदाजनक दिा से संबंजधत परामिड ईपल ध कराना; और / या o दिाआयां ज ाआब करना

 

3.7.2 िा ्य जि ा : कोइ अर एम पी िा ्य संिधडन और रोग रोकथाम संदिे भेज सकता ह।ै य संदिे , खुराक, िारीररक द याकलाप, धु पान बंद करना, सांस गक सं मणक अदद से संबंजधत हो सकते ह। आसी कार िह जतर ा, ायाम, ि छता पिजतयक, म छर जनयं ण अदद पर सलाह दे सकता/सकती ह।ै

. 3.7.3  परामिड : यह मरीजक को दी जाने िाली जिजि सलाह है और मूल दिा को कम करने के जलए ईदाहरण के जलए आसम भोजन जतबंध, क सर जतरोधी औषजधयक पर दकसी मरीज को ‘टया करे, टया न करे’ संबंधी सलाह, िण यं का ईजचत आ तेमाल, होम दफजीयोथेरेपी अदद िाजमल हो सकते ह। आसम ऐसी नइ जांचक के जलए सलाह भी िाजमल हो सकती ह,ै जो ऄगले परामिड से पहले की जानी अि यक हक।

. 3.7.4  दिाआयां ज ाआब करना

टेलीमेजडजसन के जररए दिाआयां ै काआब करना, अर एम पी का ािसाजयक जििेकाजधकार ह।ै आसम िही ािसाजयक जिाबदहे ी ऄजनिायड होती ह जो परंपरागत जोगत परामिड म ह। यदद दकसी मेजडकल दिा के जलए जनदान और ज ाआब करने हते ु दकसी जििेष संलेख की अि यकता हो जो जोगत परामिड के मामले म हो, तो टेलीमेजडजसन परामिड पर भी िही चजलत जसिांत लागू हकगे।

अर एम पी, टेलीमेजडजसन के जररए के िल तभी दिाआयां ज ाआब कर सकता ह,ै जब अर एम पी आस संबंध म संतु हो दक ईसने मरीज की मेजडकल दिा के बारे म पयाडि और सुसंगत सूचना ाि कर ली ह और ज ाआब की गइ दिाआयां मरीज के सिो म जहत म ह ।

दकसी समुजचत जनदान / ऄनंजतम जनदान के जबना दिाआयां ज ाआब करने का ऄथड होगा ािसाजयक कदाचार।

जिजि जतबधं

परामिड के कार और परामिड के तरीके पर जनभडर करते ए, टेलीमेजडजसन के जररए परामिड पर दिाआयां ज ाआब करने पर कुछ जतबंध ह। ऐसी दिाआयक की ेजणयां, जो टेलीमेजडजसन के जररए ज ाआब की जा सकती ह,ै समय-समय पर के र सरकार के परामिड से यथा ऄजधसूजचत हकगी।
ईन दिाआयक की ेजणयां, जो ज ाआब की जा सकती ह, नीचे सचू ीबि की गइ ह:

 सचू ी सा : आसम ऐसी दिाआयां िाजमल होगी, जो टेलीपरामिड के दकसी तरीके के जररए ज ाआब दकए जाने के जलए सुरज त ह, सार प म ईनम जन जलजखत िाजमल हकगी :

o ऐसी दिाआयां, जजनका आ तेमाल सामा य दिा म दकया जाता है और ऄटसर ‘काईंटर पर’ ईपल ध ह। ईदाहरण के जलए आन दिाआयक म पैराजसटामोल, ओ अर एस घोल, खांसी म चूसने की गोजलयां अदद
o ऐसी दिाआयां, जो लोक िा ्य की अपातकाजलक ज थजतयक के दौरान अि यक मानी जा सकती ह।

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 15  सचू ी क : ये ऐसी दिाआयां ह, जो पहले परामिड जो िीजडयो परामिड ह,ै के दौरान ज ाआब की जा सकती ह

और ऄनुितनड के मामले म पनु भडरण के जलए पुनः ज ाआब की जा सकती ह।

o यह एक समािेिी सूची होगी, जजसम द ु पयोग की कम सभं ािना िाली ऄपे ाकृत सुरज त दिाआयां िाजमल ह। यह ईन दिाआयक की सूची ह,ै जज ह अर एम पी दकसी ऐसे मरीज को ज ाआब कर सकता ह,ै जो एक पुनभडरण के प म ऄनिु ती परामिड ले रहा ह।ै

  सचूीख:यहऐसीदिाआयककीसूचीहैजज ह अरएमपीदकसीऐसेमरीजकोज ाआबकरसकताह,ैजो ऄनुिती परामिड ले रहा ह।ै यह ईन दिाआयक के ऄजतररो है जो ईसी मेजडकल दिा के जलए जोगत परामिड के दौरान ज ाआब की गइ ह।ै

   जतबजं धत सचू ी : टेलीमेजडजसन के जररए परामिड ईपल ध कराने िाला कोइ अर एम पी, आस सूची म दी गइ दिाइज ाआबनह करसकता।आनदिाआयकम द ु पयोगकीएकई संभािनाहैऔरयददआनकाऄनुजचत ढंग से आ तेमाल दकया जाता है तो यह मरीज को या परू े समाज को नुकसान प च ा सकती ह।ै

o औषजध एिं साधन साम ी ऄजधजनयम की ऄनुसूची ‘भ’ और जनयमािली म सूचीबि की गइ दिाआयां या िापक औषजध एिं मनः भािी पदाथड ऄजधजनयम, 1985 म सूचीबि कोइ िापक और मनः भािी पदाथड

उपर ईज लजखत सूची दी गइ औषजधयां सं ेप म ऄनुबंध-1 म दी मइ ह।

कोइ ज ज पिन जारी करना और षे ण

o यदद अर एम पी ने दिाआयां ज ाआब की ह तो अर एम पी, भारतीय अयु ि ान पररषद् ( ािसाजयक अचरण, जि ाचार एिं नैजतकता) जिजनयमािली के ऄनुसार एक ज ज पिन जारी करेगा और औषजध एिं साधन साम ी ऄजधजनयम और जनयमािली के ईपबंधक का ई लंघन नह करेगा। फामेट का एक नमूना, ऄनुबंध 2 म सुझाया गया ह।ै

o अरएमपी,ह ता रदकएगएज ज पिनकीफोटो, कैन,जडजीटल जतया इ-ज ज पिनमरीजको इ-मेल या दकसी मेसेनजग लेटफामड के जररए ईपल ध कराएगा।

o यदद अर एम पी, ज ज पिन सीधे दकसी फामेसी ेजषत कर रहा है तो ईसे मरीज की ऄजभ ो सहमजत सुजनजित करनी चाजहए जो ईसे ईसकी पसंद की दकसी फामेसी से संजितररत दिाआयां ाि करने का हकदार बनाती हो।

सारणी:परामिडके कारऔरतरीकेपरअधाररतऄनमुतऔषजधसचूीकामरैरटस

 

स चू ी स म हू

परामिड का तरीका

  

परामिड का ि प

दिाआयक की सूची

(िीजडयो/ऑजडयो/टैट ट)

(पहला परामिड/ऄनुिती)

सा

कोइ

कोइ

सूची सा1

िीजडयो

पहला परामिड
जचदक सन की जनरंतरता के जलए ऄनुिती परामिड

सूची क2

कोइ

ऄनुिती

सूची ख3

जतबजं धत

ज ाआब न की जाए

ज ाआब न की जाए

औषजध एिं साधन साम ी ऄजधजनयम और जनयमािली की ऄनसु ूची

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THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

‘फ’ या िापक औषजध और मनः भािी पदाथड ऄजधजनयम, 19854 म सूचीबि कोइ िापक और मनः भािी पदाथड

1. आस सूची म अमतौर पर आ तेमाल की जाने िाली ‘काईं टर पर’ दिाआयां जैसे पैराजसटामोल, मौजखक पुनः जलयोजन घोल (ओ अर एस) के पकै े ट, य ल अदद िाजमल थी।
आस सूची म ऐसी दिाआयां भी िाजमल ह, जो अपातकाजलक ज थजतयक के दौरान अि यक मानी जा सकती ह ।

2. आस सूची म अमतौर पर ज ाआब की जाने िाली दिाआयां िाजमल ह, जजनके जलए जनदान केिल िीजडयो परामिड के जररए ही संभि है जैसे
टीजनअ ु ररस के जलए एंटीफं गल दिाआया,ं कं जटटीिाआरटस अदद के जलए जस ो लोटसाजसजलन अइ ा स और जचरकाजलक रोगक जैसे मधुमहे ,
ई रोचाप दमा अदद के जलए पुनभरड ण दिाआयां।

3. आस सूची म ऐसी ऄजतररो दिाआयां िाजमल ह,ै जजनका आ तेमाल ितडमान दिा को आ तम बनाने के जलए दकया जाता ह,ै ईदाहरण के जलए, यदद
मरीज ई रोचाप के जलए पहले से ही एटेनोलोल पर है और रोचाप जनयंज त नह है तो एसीइ जनरोधक जैसे आनालापररल।

4. ईदाहरण के जलए क सर जतरोधी औषजध; िापक जैसे मोरदफन, कोडेने अदद।

3.7

3.7.1

सामा यतः दकसी अर एम पी के क ड और जज मदे ाररयां

जचदक सीय नजै तकता, अकं डक की गोपनीयता और ऄ य गोपनीयता3

 

. 3.7.1.1  भारतीय अयु ि ान पररषद ऄजधजनयम के ऄनुसार मरीज की जनजता और गोपनीयता के संर ण के जलए ािसाजयक मापदडं क सजहत जचदक सीय नैजतकता के जसिांत बा यकारी हकगे और ई ह बनाए रखा जाना चाजहए तथा िहार म लाया जाना चाजहए।

. 3.7.1.2  पंजीकृत जचदक सा िसायी के जलए यह अि यक होगा दक िह मरीज की जनजता और गोपनीयता संरज त करने के जलए और मरीज के संबंध म ऐसी जोगत सूचना के ऄंतरण और हड ल करने के संबंध म भारतीय अयु ि ान पररषद् ( ािसाजयक अचरण, जि ाचार और नैजतकता) जिजनयमािली, 2002 और सूचना ौ ोजगकी ऄजधजनयम, अंकडा संर ण एिं जनजता कानून या समय-समय पर ऄजधसूजचत लागू होने िाले ऄ य जनयमक के ईपबंधक का पालन करे। यह बा यकारी होगा और आसे बनाए रखा जाना चाजहए तथा िहार म लाया जाना चाजहए।

. 3.7.1.3  पंजीकृत जचदक सा िसायी को गोपनीयता के ई लंघन के जलए जज मोदार नह माना जाएगा, यदद यह जि ास करने के जलए कोइ तकडसंगत सा य मौजूद है दक मरीज की जनजता और गोपनीयता के साथ दकसी ौ ोजगकीय ई लंघन या अर एम पी के ऄलािा दकसी ऄ य जो ारा समझौता दकया गया ह।ै अर एम पीज को यह सुजनित करना चाजहए दक ऐसी सेिा को दकराए पर लेने के दौरान ईजचत मा ा म सािधानी बरती गइ ह।ै

. 3.7.1.4  कदाचार
जििेष प से यह नोट दकया गया है दक ािसाजयक अचरण, नैजतकता अदद के जलए भारतीय अयु ि ान पररषद् ऄजधजनयम के ऄंतगडत सभी सामा य ित के ऄलािा, टेलीमेजडजसन का आ तेमाल करतेसमयसभीऐसीकारडिाइयांजोजानबूझकरमरीजकीदखेभालयाजनजताऔरगोपनीयतासे

3 अर एम पी की यह जज मेदारी है दक िह ितडमान अकं डा सरं ण और गोपनीयता के कानून से ऄिगत हो। अर एम पी, दकसी जोगत परामिड से सबं ंजधत मरीज की गोपनीयता का ई लघं न न करे। ईदाहरण के जलए : यदद अर एम पी, दकसी जििेष रोग दिा से पीजडत मरीजक के जलए िा ्य जि ा के सार के जलए िा तजिक सहायता समूह सृजजत करने की योजना बना रहा है तो मरीज की आ छा के बारे म सतकड रहगे ा और ईनकी सहमजत के जबना ई ह समहू म िाजमल करके मरीज की गोपनीयता का ई लंघन नह करेगा।

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 17

 

समझौता करती है या दकसी चजलत कानून का ई लंघन करती ह,ै ईनकी ऄजभ ो प से ऄनुमजत

न ह ह ।ै
जजन कारडिाआयक की ऄनुमजत नह ह,ै ईनके कुछ ईदाहरण जन जलजखत हःै –

  अर एम पी का टेलीमेजडजसन पर जोर देना, जब सुजिधा और / या जोगत परामिड के ऄनुरोधक के जलए
मरीज या ा करने का आ छु क हो।

  अर एम पी ारा मरीज की त िीरक और अंकडक का द ु पयोग करना जििेष प से जनजी और संिेदनिील
ि प िाले (ऄथातड जब अर एम पी मरीज की सु प त िीर सोिल मीजडया अदद पर ऄपलोड करता ह)ै

  अर एम पी, जो जिजि जतबंजधत सूची से दिाआयां ज ाआब करने के जलए टेलीमेजडजसन का आ तेमाल करता
ह।ै
अर एम पी को दकसी जि ापनक या लोभनक के जररए टेलीमेजडजसन के जलए ऄनुरोध करने की ऄनुमजत नह ह।ै
3.7.1.5 िाज तयां : भारतीय अयु ि ान पररषद ऄजधजनयम के ऄनुसार नैजतकता और ऄ य चजलत काननू ।

3.7.2 परामिड का जडजीटल रेल / द तािजे ीकरण रखना

अर एम पी के जलए अि यक है दक िह समय-समय पर यथा जिजनधाडररत ऄिजध के जलए जन जलजखत ररकाडड / द तािेज रखे :-

3.7.2.1 टेलीमेजडजसन जिचार-जिमिड का लॉग या ररकाडड (ऄथातड फोन लॉ स, इ-मेल ररकाड,ड चैट / टेट ट ररकाड,ड िीजडयो जिचार-जिमिड लॉ स अदद)

3.7.2.2 टेलीमेजडजसन परामिड म ईपयोग म लाए गए मरीज के ररकाड,ड द तािेज, त िीर , नैदाजनक अंकडे (जडजीटल या गैर-जडजीटल) अदद अर एम पी ारा रखे जाने चाजहए।

3.7.2.3 जििेष प से यदद कोइ ैज पिन, मरीज के साथ साझा दकया गया है तो अर एम पी के जलए यह अि यक है दक िह जोगत परामि के जलए यथा ऄपेज त ेज पिन ररकाडड रखे।

3.7.3 टेलीमजे डजसन परामिड के जलए ि ु क

3.7.3.1 िु क की दजृ से टेलीमेजडजसन परामि को ईसी कार माना जाना चाजहए जैसे जोगत परामि को माना जाता ह।ै अर एम पी, ईपल ध कराए गए टेलीमेजडजसन परामिड के जलए एक समुजचत िु क भाररत कर सकता ह।ै

3.7.3.2 दकसी अर एम पी को, टेलीमेजडजसन अधाररत परामिड ईपल ध कराने के जलए भाररत िु कके जलए एक रसीद/आनिायस भी दने ा चाजहए।

2. टेलीमजे डसीन के जलए ढाचं ा
आस भाग म पांच पररद ृ यक म टेलीमेजडजसन की ैजटटस करने के जलए ढांचा द ित दकया गया है :

1. मरीज से पंजीकृ त जचदक सा िसायी

2. देखभालकताड से पंजीकृ त जचदक सा िसायी

3. िा ्यकमीसेपंजीकृतजचदक सा िसायी

4. पंजीकृ त जचदक सा िसायी से पंजीकृ त जचदक सा िसायी

5. अपातकाजलक ज थजतयां

ऄजनिायड जसिांत -दकसीपजंीकृतजचदक सा िसायीका ािसाजयकजनणयड,मागडदिीजसिांतहोनाचाजहए।एक

अर एम पी, यह जनणडय लने े के जलए सबसे ऄ छी ज थजत म होता है दक टया एक ौ ोजगकी

18

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

4.1

4.1.1

अधाररत परामिड पयाडि है या जोगत पुनरी ण की अि यकता ह।ै जचदक सा िसायी, ईजचतजििेकाजधकारकाआ तेमालकरेगाऔरदखेभालकीगुणि ाकेसाथसमझौतानह करेगा।

-िहीजसिातंलागूहकग,ेचाहेटेलीमजेडजसनपरामिडकेजलएआ तमेालदकयागयातरीका(िीजडयो, ऑजडयो, टेट ट) कोइ भी हो। तथाजप, आ तेमाल दकए गए संसूचन के तरीके पर जनभडर करते ए मरीज बंधन और आलाज जभ हो सकता ह।ै

–  जचदक सीय दिा के कार पर जनभरड करते ए संसूचन के तरीके के जलए अर एम पी को ऄपने ािसाजयक जििके ाजधकार का आ तेमाल करना चाजहए। यदद दकसी मामले म जांच के जलए एक िीजडयो परामिड अि यक हो तो अर एम पी को आसके जलए प प से कहना चाजहए।

–  अर एम पी दकसी भी समय परामिड न दने े का जिक प चनु सकता ह।ै दकसी भी चरण म अर एम पी, जोगत परामिड के जलए रेफर कर सकता है या ईसके जलए ऄनुरोध कर सकता ह।ै

–  मरीज को यह ऄजधकार है दक िह दकसी भी चरण म टेलीपरामिड बदं कर द।े
मरीजऔरपजं ीकृतजचदक सा िसायीकेबीचपरामिड
जििेष प से आस भाग म , पहले परामिड और ऄनुिती परामिड, जब कोइ मरीज दकसी अर एम पी के साथ परामिड करता ह,ै म आ तेमाल दकए जाने िाले टेली परामिड की द या के मखु घटकक का जि तार से िणडन दकया गया ह।ै
आन दो ज थजतयक म मरीज टेलीमजे डजसन परामिड अरंभ करता है और आसम सहमजत ऄतं नजहत होती ह।ै पहलापरामिड:मरीजसेपजं ीकृतजचदक सा िसायी

  

4.1.1.1

1. 2.

3.

पहले परामिड का ऄथड जन जलजखत है

मरीज, अर एम पी के साथ पहली बार परामिड कर रहा ह;ै या
मरीज ने पहले अर एम पी के साथ परामिड दकया है परंतु जपछले परामिड से 6 महीने से ऄजधक बीत गए ह;ै या
मरीज ने पहले अर एम पी के साथ परामिड दकया है परंतु दकसी जभ िा ्य दिा के जलए।

4.1.1.2 टेली-परामिड द या

द या का िाह जच 1 म सं ेप म ददया गया है और चरण जि तारपूिकड नीचे ददए गए है :

1. पहले परामिड के जलए टले ीमजे डजसन परामिड का ारंभण
o टेलीमेजडजसन परामि,ड मरीज ारा अरंभ दकया जाता ह।ै (ईदाहरण के जलए कोइ मरीज दकसी अर एम

पी को ऑजडयो या िीजडयोकॉल कर सकता है या एक ि थ प ृ छा के साथ इ-मेल या टेटसट भेज सकता

ह।ै
o अर एम पी परामिड देना िीकार करता ह।ै

2. मरीज की पहचान और सहमजत
o अर एम पी को मरीज का नाम, अय,ु पता, इ-मेल अइ डी., फोन नंबर या कोइ ऄ य पहचान, जो

तकडसंगतहो,पछू करऄपनीसंतुज केऄनुसारमरीजकीपहचानकीपुज करनीचाजहए।
o टेलीमेजडजसन परामिड, मरीज ारा अरंभ की जानी चाजहए और आसके ारा सहमजत ऄंत नजहत ह।ै

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 19

 

3. ती दिा जनधारड ण
o ईपल ध आनपुट के अधार पर अर एम पी ारा मरीज की दिा का ती ता से जनधारड ण दकया जाना

अि यकहैऔरअरएमपीयहजनणडयलनेेम ऄपने ािसाजयकजििेकाजधकारकाआ तेमालकरताहै

दक टया अपातकाजलक देखभाल की अि यकता ह।ै
o यदद मरीज की दिा के जलए अपातकाजलक ह त ेप की अि यकता है तो थमोपचार/ त काल राहत की

सलाह दी जाती है और यथा ईपयुो रेफरल के जलए मागडदिनड ददया जाता ह।ै
यदद मरीज की दिा के जलए अपातकाजलक ह त पे की अि यकता नह है तो जन जलजखत कदम ईठाए जाते ह :

4. मरीजकेम ूयाकंनकेजलएसचूनाकाअदान- दान
o अर एम पी, मरीज से कह सकता है दक िह सुसंगत सूचना (जिकायत, ईसी सम या के जलए दकसी ऄ य

परामिड के बारे म सूचना, ईपल ध जांच और दिाआयां, यदद कोइ ह, के योरे) ईपल ध कराए। अर एम

पी के साथ मरीज ारा साझा की गइ सूचना की पररिुिता के जलए मरीज जज मेदार होगा।
o यदद अर एम पी यह महसूस करता है दक आस चरण म ईपल ध कराइ गइ सूचना ऄपयाडि है तो िह मरीज से ऄजतररो सूचना के जलए ऄनुरोध करेगा। यह सूचना, ईस सूचना के ि प के ऄनसु ार बाद म िा तजिक समय म या इ-मेल / टेट ट के जररए साझा की जा सकती ह।ै यह परामिड, ऄजतररो सूचना की ाजि के पिात पुनः जनधाडररत दकए गए समय पर पुनः अरंभ की जा सकती है (आसम योगिाला के और जिदकरण जचदक सीय कु छ परी ण िाजमल हो सकते ह) । आसी बीच अर एम पी यथा ईपयुो िा ्य

सलाह ईपल ध करा सकता / सकती ह।ै
o यदद अर एम पी आस संबंध म संत ु है दक ािसाजयक राय दान करने के जलए ईसके पास मरीज की

पयाडिसूचनाहैतोिहटेलीमेजडजसनकेजररए बंधनकेजलएईसकीईपयुोताहतेुऄपने ािसाजयक

जनणडय का आ तेमाल कर सकता / सकती ह।ै
o यदद अगे टेलीमेजडजसन परामिड के जलए ज थजत ईपयोु नह है तो अर एम पी को यथा ईपयुो िा ्य

सलाह / जि ा दान करनी चाजहए और / या जोमत परामिड के जलए रेफर करना चाजहए।

5. मरीज बधंन
यदद दिा का बंधन, समुजचत ढंग से टेलीमेजडजसन के जररए दकया जा सकता है तो अर एम पी जन जलजखत म से दकसी के जलए कोइ ािसाजयक जनणडय ले सकता हःै

o आस मामले म यथा ईपयुो िा ्य जि ा ईपल ध कराना; और/या
o नइ जांच, जो ऄगले परामिड से पहले की जानी अि यक हो, से संबंजधत सलाह सजहत जिजि नैदाजनक

दिा से संबंजधत परामिड ईपल ध कराना; और/या
o सूची सा ईज लजखत दिाआयां ज ाआब करके जिजि आलाज ईपल ध कराना (जो काईंटर म जमलने िाली

या यथा ऄजधसूजचत औषजधयां ह) । ऄजतररो दिाआयां (सूची ‘क’ के ऄनुसार) भी ज ाआब की जा सकती ह, यदद चल रहा टेलीपरामि,ड िीजडयो पर ह।ै

4.1.2 ऄनिु ती परामिड : मरीज से पजं ीकृ त जचदक सा िसायी

ऄनुिती परामिड म, चूंदक अर एम पी-मरीज जिचार-जिमिड, ऄनुितडन के ऄंतगडत जिजि जचदक सीय दिा के जलए पहले ही हो गया ह,ै आसजलए जपछले ररकाडड की ईपल धता के साथ संदभड की पहले से ही समझबूझ होती ह।ै आससे अर एम पी और मरीज के बीच ऄजधक जनिया मक और सुरज त जिचार-जिमिड संभि होता ह।ै

4.1.2.1 ऄनिु ती परामिड का ऄथड जन जलजखत है :

मरीज ऄपने जपछले जोगत परामिड, के 6 महीने के ऄंदर परामिड ले रहा /रही है और यह परामिड, ईसी िा ्य दिा की देखभाल के म म ह।ै ऄनुितनड , दकसी जचरकाजलक रोग या दकसी आलाज की ज थजतयक म हो सकता है (ऄथाडत निीकरण या दिाइयक म पररितडन), जब अमने-सामने परामिड अि यक नह ह।ै आस कारकेजचरकाजलकरोगककेईदाहरणजन है:दमा,मधमुेह,ई रोचापऔरजमरगीअदद।

20

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

4.1.2.2

टेलीपरामिड की द या

आस द या का िाह सं ेप म जच 2 म ददया गया है और चरणक का जििरण नीचे ददया गया है :

1. ऄनुितडन के जलए टेलीमेजडजसन परामिड का ारंभण
o मरीज, संसूचन के दकसी तरीके का आ तेमाल करके चल रहे आलाज के दौरान ई प दकसी

नइ जिकायत या जरटलता के जलए या चल रहे ऄपने आलाज की जनरंतरता के जलए दकसी अर एम पी के साथ ऄनुिती परामिड अरंभ कर सकता ह।ै ईदाहरण के जलए मरीज दकसी अर एम पी को एक ऑजडयो या िीजडयो कॉल कर सकता है या दकसी जिजि िा ्य पृ छा के साथ से इ-मेल या टेट ट मैसेज भेज सकता ह।ै

o अर एम पी परामिड देना िीकार करता है

2. मरीज की पहचान और सहमजत
o अर एम पी तकडसंगत ढंग से आस बात से सहमत होना चाजहए दक िह जाने-पहचाने मरीज

के साथ बातचीत कर रहा/रही ह।ै ईदाहरण के जलए यदद मरीज, अर एम पी के साथ

पंजीकृ त फोन नंबर या पंजीकृ त इ-मेल अइ डी. के जररए बातचीत कर रहा ह।ै
o यददकोइसंदेहहोतोअरएमपी,मरीजसेयहऄनरुोधकरसकताहैदकिहदकसी पंजीकृतफोननंबरयाइ-मेलअइडी.सेबातचीतपनुःअरंभकरेयामरीजकानाम,अयु, पता, इ-मेल अइ डी. या फोन नंबर पछू कर ऄपनी संतुज के ऄनुसार मरीज की पहचान की

पुज करनी चाजहए। (जििरण धारा 3.2 म ददए गए ह)
o मरीज टेलीमेजडजसन परामिड अरंभ करता है और आसम सहमजत, ऄंत नजहत ह।ै

3. अपातकाजलक दिा का ती जनधारड ण
o यदद मरीज म कोइ जिकायत ददखाइ देती ह,ै जजसकी पहचान अर एम पी एक ऐसी

अपातकाजलक ज थजत के प म करता ह,ै जजसके जलए त काल देखभाल की अि यकता है तोअरएमपीत कालराहतईपल धकरानेकेजलए थमोपचारहतेुसलाहदगेाऔर जैसा अि यक समझा जाए मरीज के रेफरल के जलए मागदड िडन करेगा।

4. न ै यक ऄनिु ती परामिड के मामले म जन जलजखत दकया जाएगा :
o यदद अर एम पी के पास मरीज का जपछला ररकाडड है तो िह देखभाल की जनरंतरता बनाए

रख सकता/सकती ह।ै
o अरएमपी,मरीजकीसूचना(आजतिृ /जांचजन कष /जांचररपोट /जपछलेररकाड)डकी

पररिुिता के अधार पर परामिड के कार के जलए ऄपने ािसाजयक जििेकाजधकार का

आ तेमाल करेगा/करेगी।
o यदद अर एम पी को ऄजतररो सूचना की अि यकता हो तो ईसे अगे कारडिाइ करने से

पहले सूचना ाि करनी चाजहए और बाद के समय के जलए टेलीपरामिड पुनः अरंभ करनी

चाजहए।

5. मरीजका बधं न
o यदद अर एम पी आस संबंध म संतु है दक ईसके पास मरीज की पयाडि सूचना है और यदद

मरीज की दिा ईजचत ढंग से टेलीपरामिड ारा जनयंज त की जा सकती है तो िह मरीज के टेली बंधन की अगे कारडिाइ करेगा।

o यददऄनुितनड,देखभालकीजनरंतरताकेजलएहैतोअरएमपीजन जलजखतम सेदकसीके जलए ािसाजयक जनणडय ले सकता है :
o मामले म यथा ईपयोु िा ्य जि ा ईपल ध कराना; या
o नइ जांचक, जो ऄगले परामिड से पहले की जानी अि यक हक, से संबंजधत सलाह सजहत

जिजि नैदाजनक ज थजत से संबंजधत परामिड ईपल ध कराना;

[भाग III—ख ड 4]

भारत का राजप : ऄसाधारण 21 और/या दिाआयां ज ाआब करना / ये दिाआयां जन जलजखत म से कोइ हो सकती है :

 यदद ऄनुितनड ईसी जचदक सीय दिा के जलए देखभाल की जनरंतता के जलए है तो अर एम पी, पुनभरड ण के जलए दिाआयक का मूल सैट ज ाआब करेगा (दिाआयक की सूची ‘क’ जो मरीज के जलए पहले ज ाआब की गइ ह)ै

यददअरएमपी,अतंररकजचदक सीयदिाकोआ तमबनानेकेजलए‘ऄजतररो’ दिाआयक के प म कोइ औषजध जोडने पर जिचार करता है तो अर एम पी सूची ‘ख’ के ऄंतगडत सूचीबि दिाआयां ज ाआब कर सकता ह।ै

  यदद ऄनुिती परामि,ड दकसी ऐसी नइ बीमारी के जलए है जजसके जलए ‘काईंटर पर जमलन’े िाली दिाआयां या आस ई े य के जलए ऄजधसूजचत दिाआयां अि यक ह तो सूची सा के ऄंतगडत दिाआयां ज स ाआब की जा सकती ह।

  यदद ऄनुिती परामिड स,े रोग के दकसी जभ दायरे से संबंजधत नये संल ण का पता चलता है तो अर एम पी पहली बार िाले परामिड के पररद ृ य म यथा ईज लजखत दिा के साथ अगे कारडिाइ करेगा (4.1.1)

 

o

 

4.2 एक दखे भालकताड के जररए मरीज और अर एम पी के बीच परामिड

4.2.1आनददिाजनदिेककेई े यकेजलए“दखेभालकता”डपररिारकाकोइसद ययामरीजका जतजनजध िकरनेिालामरीज ारा ाजधकृ त कोइ जो हो सकता ह।ै

4.2.2 दो संभाजित सैरटग हो सकते ह :

1. परामिड के दौरान दखे भालकताड के साथ मरीज मौजदू हो।

2. दखे भालकताड के साथ मरीज मौजदू न हो। जन जलजखत म ऐसा मामला हो सकता है :
2क. मरीज नाबाजलक (16 िषड या आससे कम ई का) है या मरीज जिकलांग है। ईदाहरण के जलए पागलपन या

िारीररकजिकलांगताअददजैसीजचदक सीयदिा म दखेभालकताडकोमरीजकीओरसेपरामिडकरनेकेजलए ाजधकृतमानाजाताहै

2ख. दखे भालकताड के पास एक औपचाररक ाजधकारप या एक ऐसा स याजपत द तािेज है जो मरीज के साथ ईसकी रर तेदारी जसि करता हो और / या आसे जपछले जोगत परामिड (ऄजभ ो परामिड) म मरीज ारा स याजपत दकया गया ह।ै

ईपयुडो सभी ज थजतयक म , परामिड पर ईसी कार ऄगली कारडिाइ की जाएगी जैसे अर एम पी और मरीज के मामले म की जाती है (पहले और ऄनुिती परामिड के मामले म , 4.1 के ऄंतगडत)।

िा ्यकमी और अर एम पी के बीच परामिड

आस ददिाजनदिे क के ई े य के जलए, िा ्यकमी कोइ नस,ड सबं धं िा ्य िसायजिद, म य तरीय िा ्य ैजटटिनर, ए एन एम या दकसी समजु चत ाजधकारी ारा नामजद कोइ ऄ य िा ्यकमी हो सकता ह।ै

ताजितढाचं ा

o आस ईप-भाग म दकसी सािडजजनक या जनजी िा ्य सुजिधा म दकसी मरीज के जलए परामिड करने िाले िा ्यकमी के बीच जिचार-जिमिड किर दकया जाएगा

o दकसी सािडजजनक िा ्य सुजिधा म दकसी ईप-क र या िा ्य एिं अरो य क र म म य तरीय िा ्य ैजटटिनर, जजले या रा य या रा ीय तर पर दकसी ई तर क र म दकसी अर एम पी के साथ मरीज के जलए टेलीमेजडजसन परामिड अरंभकरसकताहैऔरईसकासम ियकरसकताह।ै िा ्यऔरअरो यक र, ापक ाथजमक िा ्यदखेभालका एक ऄजभ ऄंग ह।ै

o आस सैरटग म िा ्य जिजिर, होम जिजजट सचल जचदक सा आकाआयां या कोइ सामुदाजयक अधाररत जिचार-जिमिड भी िाजमल ह।ै

टेलीपरामिड की द या

आस द या का िाह सं ेप म जच 2 म ददया गया है और चरणक का जििरण नीचे ददया गया है :

 

22

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III—SEC. 4]

 

1.

2.

3. 4.

दकसी िा ्यकमी / अर एम पी के जररए टेलीमजे डजसन परामिड का ारंभण

o आस परामिड का अधार-िाटय यह है दक मरीज को िा ्यकमी ारा दखे जलया गया ह।ै

o िा ्यकमी के जनणडय के ऄनुसार अर एम पी के साथ टेलीपरामिड अि यक ह।ै
o िा ्यकमी को मरीज की सूजचत सहमजत ाि करनी चाजहए।
o िा ्यकमी को टेलीमेजडजसन परामिड के संभाजित आ तेमाल और सेिाएं प करनी चाजहए।

o ईसे मरीज का नाम, अयु, पता, इ-मेल अइ डी., फोन नंबर या कोइ ऄ य पहचान, जो तकड संगत हो, पूछ कर मरीज की पहचान की भी पुज करनी चाजहए।

o िा ्यकमी, टेलीमेजडजसन परामिड ारंभ करता है और ईसे सुसा य बनाता है।

मरीज की पहचान (अर एम पी ारा)

o अर एम पी को, मरीज का नाम, अयु, पता, इमेल अइ डी, फोन नंबर या कोइ ऄ य पहचान, जो तकडसंगत हो, पूछकर ऄपनी संतुज के ऄनुसार मरीज की पहचान की पुज करनी चाजहए।

o अर एम पी ारा मरीज को ऄपनी पहचान से भी ऄिगत कराना चाजहए। मरीज की सहमजत (अर एम पी ारा)

o अज एम पी को परामिड जारी रखने के जलए मरीज की सहमजत की पुज करनी चाजहए। अपातकॉल के मामले म

o िा ्यकमी, अर एम पी को मरीज की अंतररक जचदक सीय दिा के बारे म िी ता से संसूजचत करेगा।
o ईपल ध कराइ गइ सूचना के अधार पर यदद अर एम पी आसकी पहचान एक ऐसी अपातकाजलक दिा के प म करताह,ैजजसकेजलएत कालदखेभालकीअि यकताहोतोईसेत कालराहतकेजलए िा ्यकमी ारा थमोपचार ईपल ध कराए जाने की सलाह दने ी चाजहए और जैसा भी अि यक समझा जाए मरीज के रेफरल के

जलए मागडदिडन करना चाजहए।
यदद दिा अपातकाजलक नह है तो जन जलजखत कदम ईठाए जाएंगे :

5. मरीजकेम ूयाकंनकेजलएसचूनाकाअदान- दान(अरएमपी ारा)

o िा ्यकमी ारा अर एम पी को ईनकी िा ्य सम या का एक जि तृत प ीकरण ददया जाना चाजहए, जजसे, यदद अि यक हो मरीज ारा ऄजतररो जानकारी से ऄनुपूररत दकया जा सकता है

o अर एम पी, ईजचत नैदाजनक जनणयड का आ तेमाल करने म समथड होने के जलए ऄपेज त मरीज की सूचना (आजतिृ / जांच जन कष / जांच ररपोट / जपछले ररकाड ) के कार और सीमा के जलए ऄपने िसाजयक जििेकाजधकार का आ तेमाल करेगा।

o यदद अर एम पी यह महसूस करता है दक ईपल ध कराइ गइ सूचना ऄपयाडि है तो िह ऄजतररो सूचना के जलए ऄनुरोध करेगा / करेगी यह सूचना, ईस सूचना के ि प के ऄनुसार िा तजिक समय म या बाद म इ-मेल / टेट ट के जररए साझा दकया जा सकता ह।ै ईदाहरण के जलए अर एम पी, मरीज के जलए कुछ योगिाला या/और रेजडयोलोजजकल परी णक की सलाह दे सकता ह।ै ऐसे मामलक के जलए, परामिड को जिराम ददया गया माना जा सकता है और पुनः जनधाडररत दकए गए समय पर पुनः अरंभ दकया जा सकता ह,ै अर एम पी दकसी समय यथा ईपयुो िा ्य जि ा ईपल ध करा सकता ह।ै

6. मरीजका बधं न

5.2

o o

एक बार अर एम पी के आस संबंध म संतु होने पर दक मरीज की ईपल ध सूचना पयाडि है और दक यह मामला टेलीमेजडजसन के जररए बंधन दकए जाने हते ु ईपयुो ह,ै िह बंधन से संबंजधत कारडिाइ करेगा। िा ्यकमी को ऄपने ररकाडड म आसका द तािेजीकरण करना चाजहए। अरएमपीजन जलजखतम सेकोइ ािसाजयकजनणडयलेसकताह;ै

o आस मामले म यथा ईपयुो िा ्य जि ा ईपल ध कराना;
o ऐसी नइ जांचक, जो ऄगले परामिड से पहले की जानी अि यक हो, से संबंजधत सलाह सजहत जिजि नैदाजनक

दिा से संबंजधत परामिड ईपल ध कराना; o और/या दिाआयां ज ाआब करना।

जो िा ्यक मयककेएककाडरजििेषकेजलएसमय-समयपरजारीदकएगएददिाजनदिेकम ददएगए आ तेमाल के जलए ज ाआब की गइ हक।

िा ्य क मयक की भजू मका

अपातकाल के सभी मामलक म , िा ्यकमी को ईस अर एम पी से त काल राहत और थमोपचार के ईपाय ाि करने चाजहए जजस अरएमपीसेटेलीपरामिडदकयाजारहाह।ै िा ्यकमीकोअरएमपी ारादीगइसलाहकेऄनसुारऔरसमुजचतदखेभालकेजलए

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 23 मरीज का रेफरल सुसा य बनाने के जलए त काल राहत / थमोपचार ईपल ध कराना चाजहए। िा ्यकमी को यह सुजनजित करना

चाजहए दक मरीज को यथािी दकसी अर एम पी के साथ जोगत प से जिचार-जिमिड के जलए सलाह दी गइ ह।ै

ऐसे मरीजक के जलए, जजनका ईजचत ढंग से बंधन टेलीमेजडजसन के जररए दकया जा सकता ह,ै िा ्य कमी जन जलजखत म मह िपूणड भूजमका जनभाते ह :

  अर एम पी ारा ईपल ध कराइ गइ िा ्य जि ा और परामिड को पुनबडजलत करना

  अर एम पी ारा ज ाआब की गइ दिाआयां ईपल ध कराना और ईसके आलाज पर मरीज को परामिड ईपल ध
कराना।

4.4 पजं ीकृ त जचदक सा िसायी से ऄ य अर एम पी / जििषे

पंजीकृतजचदक सा िसायी,ईसकीदखेभालकेऄधीनदकसीमरीजकेजलएऄ यअरएमपीयादकसीजििेष केसाथ परामिड करने के जलए टेलीमेजडजसन सेिा का ईपयोग कर सकता ह,ै ऐसे परामिड ईसके िसाजयक जनणडय पर दकसी अर एम पी ारा अरंभ दकए जा सकते ह।

  ऄ यअरएमपीकीसलाहमांगनेिालाअरएमपीहीआलाजकरनेिालाअरएमपीबनारहताहैऔरिहमरीजको ददए जाने िाले आलाज और ऄ य जसफाररिक के जलए जज मेदार होगा।

  यह बात िीकार की जाती है दक जिदकरण-जि ान, रोग-जि ान, ने रोग-जि ान, दयरोग-जि ान, िचा रोग-जि ान अदद जैसी ऄनेक जचदक सीय जििेष ताएं, सूचना के अदान- दान के जलए ौ ोजगकी के ऄंगीकरण के ई त चरण म हो सकतीहैयाआनम सेकुछ ारंजभकचरणम होसकतीह।ैददिाजनदिे जनदान, बंधनऔररोगककीरोकथामकेजलए सूचना ौ ोजगकी का आ तेमाल करते ए अर एम पी / जििेष क के बीच ए जिचार-जिमिड का समथडन करते ह और ो साजहत करते ह।

o टेली-रेजडयोलोजी, एक थान से दसू रे थान पर रेजडयो ादफक त िीर / एटस-रेज, सी टी, एम अर अइ, पी इ टी/ सी टी, एस पी इ सी टी / सी टी, एम जी, ऄ रासाईंड) भेजने की यो यता ह।ै

o टेली-पथैोलोजी,जनदान,जि ाऔरऄनुसंधानकेई े यककेजलए,दरू थ थानककेबीचआमेज-ररचपैथोलोजी अंकडे ऄंतररत करने की ौ ोजगकी का ईपयोग ह।ै

o टैली-ओफथालमोलोजी, दरू थ े क म मरीजक के जलए ने जििेष क को ने रोग ीननग, जनदान और मॉजनटररग तक प च दान करती ह।ै

4.5 अपातकाजलक ज थजतयां

सभी टेलीमेजडजसन परामि म , अर एम पी के जनणडय के ऄनुसार, यदद यह एक अपातकाजलक ज थजत ह,ै तो ल य और ई े य, यथािी जोगतदखेभालईपल धकरानाहोनाचाजहए।तथाजप,मह िपूणडकदम, ाणर ाहोसकताहैऔरमागडदिडन तथा परामिड मह िपूणड हो सकता ह।ै ईदाहरण के जलए ऐसे मामलक म जहां ऄजभघात िाजमल हो, गदनड की ज थजत बनाए रखने

के आदड-जगदड दी गइ सही सलाह और मागडदिडन, कु छ मामलक म मे दडं की र ा कर सकती ह।ै ये ददिाजनदिे , ऐसी ज थजतयक म एक संतुजलत दजृ कोण ईपल ध कराने के जलए तैयार दकए गए ह। अर एम पी, ऄपने िसाजयक जििेकाजधकार के अधार पर:

o थमोपचार की सलाह दे सकता / सकती ह।ै o परामिड दे सकता / सकती ह।ै
o रेफरल को सुसा य बना सकता / सकती ह।ै

अपातकॉल के सभी मामलक म मरीज को यथािी दकसी पंजीकृत जचदक सा िसायी के साथ जोगत जिचार-जिमिड की सलाह दी जानी चाजहए।

     

24 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

5. टेलीमजे डजसन को समथकड ारी बनाने िाले ौ ोजगकी लटे फाम के जलए ददिाजनदिे

आसम जििेष प से ऐसे ौ ोजगकी लेटफामड किर दकए गए ह, जो पंजीकृत जचदक सा िसाजययक के पूरे नेटिकड म काम करते ह और मरीजक को लेटफामड के जररए अर एम पी के साथ परामिड करने म समथड बनाते ह।

. 5.1  ईपभोोा को टेलीमेजडजसन सेिाएं ईपल ध कराने िाले ौ ोजगकी लेटफाम (मोबाआल ए स, िेबसाआट अदद) को यह
सजु नजित करना ऄजनिायड होगा दक ईपभोोा, भारतीय अयु ि ान पररषद या ऄपनी-ऄपनी रा य अयु ि ान पररषदक के
साथ जिजधित पंजीकृ त, पजं ीकृ त जचदक सा िसाजययक के साथ परामिड कर रहे ह और सुसंगत ईपबंधक का ऄनुपालन कर रहे ह।

. 5.2   ौ ोजगकी लेटफामड, ऄपने ऑनलाआन पोटडल पर दकसी अर एम पी को सूचीबि करने से पहले ऄपना ईजचत ऄ यिसाय करेगा। लेटफामड म ईस लेटफामड पर सूचीबि यके अर एम पी का नाम, िजै क यो यता, और पजं ीकरण स ं या, सपं कड योरे ईपल ध कराए जाने चाजहए।

. 5.3  कोइ ऄनुपालन न करना नोट दकए जाने की ज थजत म , ौ ोजगकी लेटफामड के जलए यह अि यक होगा दक िह भारतीय अयु ि ान पररषद् के ऄजध मण म िासी बोडड को आसकी सचू ना द,े जो समुजचत कारडिाइ कर सकता ह।ै

. 5.4  कृज म असचू ना / मिीन ल नग पर अधाररत ौ ोजगकी लेटफाम को मरीजक को परामिड दने े या दकसी मरीज को कोइ दिाआयांज ाआबकरनेकीऄनमु जतनह है।केिलकोइअरएमपीहीपरामिडदने ेऔरदिाआयांज ाआबकरनेकाहकदार है और ईसे आस संबंध म मरीज के साथ सीधे बातचीत करनी चाजहए। जबदक कृज म असूचना, जिषयक का आंटरनेट, ई त अंकडा- जि ान अधाररत जनणडय समथडन णाजलयक जैसी नइ ौ ोजगदकयां, मरीज की मू यांकन, जनदान या बंधन पर दकसी अर एम पी की सहायता और समथडन कर सकती ह परंतु ऄंजतम ज ज पिन या परामिड सीधे अर एम पी ारा दान दकया जाना होगा।

. 5.5   ौ ोजगकी लेटफामड को यह सुजनजित करना चाजहए दक ऐसी दकसी पृ छा या जिकायत, जो ऄं य ाहक की हो, का हल जनकॉलने के जलए एक ईजचत तं मौजूद ह।ै

. 5.6  यदद कोइ जिजि ौ ोजगकी लेटफामड ई लंघन करने िाला पाया जाए तो िासी बोडड, भा.अ.प. ईस लेटफामड को लैकजल टेड नाजमत कर सकता है और आसके पिात कोइ अर एम पी, टेलीमेजडजसन ईपल ध कराने के जलए ईस लेटफामड का आ तेमाल नह कर सकता।

6. भारतीयअय ुि ानपररषद्केऄजध मणम िासीबोडड(बीओजी-एमसीअइ)कीजििषे जज मदेाररयां

. 6.1  टेलीमेजडजसन ैजटटसददिाजनदिेकम दीगइऔषजध-सूजचयकम सेदकसीभीसूचीको,यथाऄपेज तसमय-समयपरभारतीय अयु ि ान पररषद, के ऄजध मण म िासी बोडड / भारतीय अयु ि ान पररषद् ारा संिोजधत दकया जा सकता ह।ै

. 6.2  भारतीयअयु ि ानपररषद्केऄजध मणम िासीबोडड,यथाऄपेज त,आनददिाजनदिेककेसंबंधम अि यकजनदिे या सलाह या प ीकरण जारी कर सकता ह।ै

. 6.3  टेलीमेजडजसन ैजटटस ददिाजनदिे , क र सरकार [ िा ्य एिं पररिार क याण मं ालय, भारत सरकार] के पूिड ऄनुमोदन से ापक लोक जहत म समय-समय पर संिोजधत दकए जा सकते ह।

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 25 पपपपपप पपपपप

  

26 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

  

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 27

  

28 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III—SEC. 4]

 

दिाआयक की सजू चयां

सूची सा

ऄनबु धं

ऄनुबंध 1

  

 सामा य काईं टर पर जमलने िाली दिाआयां जसै े o िरनािी : पाराजसटामोल

o खांसी संपूरक : लोज जस
o खांसी / जुकाम की दिाइयां (जैसे एसीटीलीजलटेन, ऄमोजनयम टलोराआड, गुएफ सन, ए रोटसोल, रोमहटे सेने,

डेटरोमेथोरफन का संयोजन)
o ओअरएसकेपैकेट
o सीरप नजक
o ऄनुपूरक : लौह एिं फोजलक एजसड की गोजलयां, जिटाजमन डी, कै ज ियम ऄनुपुरक o अदद

 अपातकाजलक अधार पर समय-समय पर ऐसे मामले म भारत सरकार ारा ऄजधसजू चत दिाआयां
o जैसे दकसी जिजि महामारी िाले े के जलए मलेररया जनयं ण के जलए टलोरो ीन, जब सरकार ारा ऄजधसूजचत

की गइ हो। सूची क

 पहले परामिड िाली दिाइयां (जनदान, परामिड के िीजडयो तरीके पर दकया गया हो) जसै े :
o िचा की बीमारी के जलए मरहम / लोिन : मरहम टलोरीमेजोले, मुजपरोजसन, कै लाजमन लोिन, ब जजल ब जोएटे

लोिन अदद।
o लोकल ओफथा मोलोजीकल ा स जैसे : ने े मला के जलए जस ो लोटसासीजलन अदद। o लोकल इयर ा स जैसे : कान के मैल के जलए टलोरीमाजोले अदद।
o ईपयुडो दिाइयक के जलए ऄनुिती परामिड

 ‘ररदफलहते’ुजचरकाजलकरोगककेजलएऄनिुतीदिाआयां(परामिडकेदकसीतरीकेपर)जसैेजन जलजखतकेजलएदिाआयां: o ई रोचाप : एनालाज ल, एटेनोलोल अदद

o मधुमेह : मेटफा मन, लीब टलामाआड अदद o दमा : सालमेरोल आनहेलर अदद
o अदद

सूची ख

 बंधन को आ तम बनाने के जलए चल रही जचरकाजलक दिाआयक के ‘ऄजतररो दिाआयक’ के प ऄनुितडन पर ै ाआब की गइ दिाआयां जैसे ई रोचाप के जलए : एटेनोलोल के साथ ऄजतररो जथअजजडे डाआयूरेरटक

o मधुमेह : मेटफो मन के साथ जसटाज लपरटन का ऄजभिधडन। o अदद

   

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : ऄसाधारण 29 ऄनुबंध 2

6 . 1 ज ज प ि न क े फ ो म टे क ा न म नू ा

   

                                         

परामिड की तारीख मरीज का नाम पता

म ु य जिकायत

आजति ृ से ािससुगंतनबदू जांच / योगिाला जन कषड

ताजितजाचं

जििषे जनदिे

अयु नलग

लंबाइ
(जहां कह लागू)

िजन
(जहां कह लागू)

एल एम पी (जहां कह लागू)

जनदान या ऄनजं तम जनदान

Rx

1. दिाइ का नाम (बडे ऄ रक म के िल जेनररक नाम के साथ) औषजध का प, र थ, लेने की बारंबारता और ऄिजध

2. दिाइ का नाम (बडे ऄ रक म केिल जेनररक नाम के साथ) औषजध का प, र थ, लेने की बारंबारता और ऄिजध

3. दिाइ का नाम (बडे ऄ रक म केिल जेनररक नाम के साथ) औषजध का प, र थ, लेने की बारंबारता और ऄिजध

अ र ए म प ी क े ह त ा र औ र म हु र

                                                                                                                  

रट पणी : यह ज ज पिन टेलीपरामिड पर सृजजत दकया गया ह।ै

   

           

पजं ीकृतजचदक सा िसायीकानाम

िैज क यो यता
पंजीकरण सं या
पता
संपकड योरे (इ-मेल और फोन नंबर)

 

30 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

BOARD OF GOVERNORS IN SUPER SESSION OF MEDICAL COUNCIL OF INDIA NOTIFICATION
New Delhi, the 12th May, 2020

No. MCI-211(2)/2019(Ethics)/100659.— In exercise of the powers conferred by Section 33 of the Indian Medical Council Act, 1956 (102 of 1956), the Board of Governors in Supersession of the Medical Council of India with the previous sanction of the Central Government, hereby makes the following Regulations to amend the “Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations, 2002:-

1. (i) These Regulations may be called the “Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) (Amendment) Regulations, 2020.”

(ii) These regulations shall deemed to have been effective from 25th March 2020 which is the date on which the Central Government has accorded approval to these Regulations.

2. In the “Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations, 2002”, the following addition shall be made:-

3.8 Consultation by Telemedicine

3.8.1 Consultation through Telemedicine by the Registered Medical Practitioner under the Indian Medical Council Act, 1956 shall be permissible in accordance with the Telemedicine Practice Guidelines contained in Appendix 5.

3.8.2 Telemedicine Practice Guidelines are designed to serve as an aid and tool to enable Registered Medical Practitioners to effectively leverage telemedicine to enhance health services and access to all in India.

3.8.3 Telemedicine Practice Guidelines are not applicable to the use of digital technology to conduct surgical or invasive procedure remotely.

3.8.4 Any of the drugs lists contained in Telemedicine Practice Guidelines can be modified by the Board of Governors in super-session of the Medical Council of India/Medical Council of India from time to time, as required.

3.8.5 The Board of Governors in super-session of the Medical Council of India may issue necessary directions or advisories or clarifications in regard to these Guidelines, as required.

3.8.6 The Telemedicine Practice Guidelines can be amended from time to time in larger public interest with the prior approval of Central Government [Ministry of Health and Family Welfare, Government of India].

Dr. RAKESH KUMAR VATS, Secy.-General

[ ADVT.-III/4/Exty./25/2020-21]

Footnote: The Principal Regulations namely, “Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations, 2002” were published in Part – III, Section (4) of the Gazette of India on the 6th April, 2002, and amended vide MCI notification dated 22/02/2003, 26/05/2004, 10/12/2009, 28/01/2016, 21/09/2016 & 01/03/2019.

Appendix – 5

BOARD OF GOVERNORS

In supersession of the Medical Council of India

Telemedicine Practice Guidelines

Enabling Registered Medical Practitioners to Provide Healthcare Using Telemedicine

  

These Guidelines have been prepared

in partnership with NITI Aayog

[This constitutes Appendix 5 of the Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics Regulation, 2002]

25 March 2020

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : असाधारण 31 TELEMEDICINE

‘The delivery of health care services, where distance is a critical factor, by all health care professionals using information and communication technologies for the exchange of valid information for diagnosis, treatment and prevention of disease and injuries, research and evaluation, and for the continuing education of health care providers, all in the interests of advancing the health of individuals and their communities.’

TELEHEALTH

‘The delivery and facilitation of health and health-related services including medical care, provider and patient education, health information services, and self-care via telecommunications and digital communication technologies.’

  

REGISTERED MEDICAL PRACTITIONER

‘A Registered Medical Practitioner [RMP] is a person who is enrolled in the State Medical Register or the Indian Medical Register under the Indian Medical Council Act 1956.’ [IMC Act, 1956]

32 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

Background
Telemedicine: An Enabler of Healthcare Access and Affordability

There are a number of benefits of telemedicine. It increases timely access to appropriate interventions including faster access and access to services that may not otherwise be available.

In India, providing In-person healthcare is challenging, particularly given the large geographical distances and limited resources. One of the major advantages of telemedicine can be for saving of cost and effort especially of rural patients, as they need not travel long distances for obtaining consultation and treatment. In this type of scenario, telemedicine can provide an optimal solution for not just providing timely and faster access. It would also reduce financial costs associated with travel. It also reduces the inconvenience/impact to family and caregivers and social factors. Telemedicine can play a particularly important role in cases where there is no need for the patient to physically see the RMP (or other medical professional), e.g. for regular, routine check-ups or continuous monitoring. Telemedicine can reduce the burden on the secondary hospitals.

With telemedicine, there is higher likelihood of maintenance of records and documentation hence minimalizes the likelihood of missing out advice from the doctor other health care staff. Conversely, the doctor has an exact document of the advice provided via tele-consultation. Written documentation increases the legal protection of both parties. Telemedicine provides patient’s safety, as well as health workers safety especially in situations where there is risk of contagious infections. There are a number of technologies that can be used in telemedicine, which can help patients adhere better to their medication regimens and manage their diseases better. Telemedicine can also enable the availability of vital parameters of the patient available to the physician with the help of medical devices such as blood pressure, blood glucose, etc management.

Disasters and pandemics pose unique challenges to providing health care. Though telemedicine will not solve them all, it is well suited for scenarios in which medical practitioners can evaluate and manage patients. A telemedicine visit can be conducted without exposing staff to viruses/infections in the times of such outbreaks. Telemedicine practice can prevent the transmission of infectious diseases reducing the risks to both health care workers and patients. Unnecessary and avoidable exposure of the people involved in delivery of healthcare can to be avoided using telemedicine and patients can be screened remotely. It can provide rapid access to medical practitioners who may not be immediately available in person. In addition, it makes available extra working hands to provide physical care at the respective health institutions. Thus, health systems that are invested in telemedicine are well positioned to ensure that patients with Covid-19 kind of issues receive the care they need.

The government is committed to providing equal access to quality care to all and digital health is a critical enabler for the overall transformation of the health system. Hence, mainstreaming telemedicine in health systems will minimize inequity and barriers to access. India’s digital health policy advocates use of digital tools for improving the efficiency and outcome of the healthcare system and lays significant focus on the use of telemedicine services, especially in the Health and Wellness Centers at the grassroots level wherein a mid-level provider/health worker can connect the patients to the doctors through technology platforms in providing timely and best possible care.

However, there has been concern on the practice of telemedicine. Lack of clear guidelines has created significant ambiguity for registered medical professionals, raising doubts on the practice of telemedicine. The 2018 judgement of the Hon’ble High Court of Bombay had created uncertainty about the place and legitimacy of telemedicine because an appropriate framework does not exist.

In India, till now there was no legislation or guidelines on the practice of telemedicine, through video, phone, Internet based platforms (web/chat/apps etc). The existing provisions under the Indian Medical Council Act, 1956, the Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics Regulation 2002), Drugs &Cosmetics Act, 1940 and Rules 1945, Clinical Establishment (Registration and Regulation) Act, 2010, Information Technology Act, 2000 and the Information Technology (Reasonable Security Practices and Procedures and Sensitive Personal Data or Information) Rules 2011 primarily govern the practice of medicine and information technology. Gaps in legislation and the uncertainty of rules pose a risk for both the doctors and their patients.

There are some countries that have put in legislative measures and some countries, which follow non-legislative measures such as guidelines to practice telemedicine. In some countries guidelines are treated as professional norms that need to be followed by medical practitioners. We reviewed these other guidelines and consulted to put together these guidelines to enable medical practitioners to practice telemedicine.

Telemedicine will continue to grow and be adopted by more healthcare practitioners and patients in a wide variety of forms, and these practice guidelines will be a key enabler in fostering its growth.

Purpose

The purpose of these guidelines is to give practical advice to doctors so that all services and models of care used by doctors and health workers are encouraged to consider the use of telemedicine as a part of normal practice. These guidelines will assist the medical practitioner in pursuing a sound course of action to provide effective and safe medical

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : असाधारण 33 care founded on current information, available resources, and patient needs to ensure patient and provider safety.

These telemedicine guidelines will help realize the full potential of these advancements in technology for health care delivery. It provides norms and protocols relating to physician-patient relationship; issues of liability and negligence; evaluation, management and treatment; informed consent; continuity of care; referrals for emergency services; medical records; privacy and security of the patient records and exchange of information; prescribing; and reimbursement; health education and counseling.

 

These guidelines will provide information on various aspects of telemedicine including information on technology platforms and tools available to medical practitioners and how to integrate these technologies to provide health care delivery. It also spells out how technology and transmission of voice, data, images and information should be used in conjunction with other clinical standards, protocols, policies and procedures for the provision of care. Where clinically

appropriate, telemedicine is a safe, effective and a valuable modality to support patient care.

Like any other technology, the technology used for telemedicine services can be abused. It has some risks, drawbacks and limitations, which can be mitigated through appropriate training, enforcement of standards, protocols and

guidelines.

These guidelines should be used in conjunction with the other national clinical standards, protocols, policies and

procedures.

1. Telemedicine: Definitions and Applications

1.1 DEFINITIONS .

. 1.1.1  Definition of Telemedicine
World Health Organization defines telemedicine as
“The delivery of health-care services, where distance is a critical factor, by all health-care professionals using information and communications technologies for the exchange of valid information for diagnosis, treatment and prevention of disease and injuries, research and evaluation, and the continuing education of health-care workers, with the aim of advancing the health of individuals and communities.”

. 1.1.2  Definition of Telehealth

. 1.1.3  Definition of Registered Medical Practitioner (RMP)

1.2 SCOPE .

  The guidelines are meant for RMPs under the IMC Act 1956

  The guidelines cover norms and standards of the RMP to consult patients via telemedicine 
EXCLUSIONS:
The guidelines specifically explicitly exclude the following:

 Specifications for hardware or software, infrastructure building & maintenance

NEJM Catalyst defines telehealth as “The delivery and facilitation of health and health-related services

including medical care, provider and patient education, health information services, and self-care via

telecommunications and digital communication technologies.”

In general, telemedicine is used to denote clinical service delivered by a Registered medical practitioner while

telehealth is a broader term of use of technology for health and health related services including telemedicine.

For the purpose of this document a ‘Registered Medical Practitioner’ is defined as a person who is enrolled in the State Medical Register or the Indian Medical Register under the IMC Act 1956.

Within the broad paradigm of telemedicine, these guidelines will be published under the IMC Act and are for privileged access only. These guidelines are designed to serve as an aid and tool to enable RMPs to effectively

leverage Telemedicine to enhance healthcare service and access to all

Telemedicine includes all channels of communication with the patient that leverage Information

Technology platforms, including Voice, Audio, Text & Digital Data exchange

34

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

  Data management systems involved; standards and interoperability

  Use of digital technology to conduct surgical or invasive procedures remotely

  Other aspects of telehealth such as research and evaluation and continuing education of health-care workers

  Does not provide for consultations outside the jurisdiction of India

. 1.3.1  A Registered Medical Practitioner is entitled to provide telemedicine consultation to patients from any part of
India

. 1.3.2  RMPs using telemedicine shall uphold the same professional and ethical norms and standards as applicable to traditional in-person care, within the intrinsic limitations of telemedicine

. 1.3.3  To enable all those RMPs who would want to practice telemedicine get familiar with these Guidelines as well as with the process and limitations of telemedicine practice:

  An online program will be developed and made available by the Board of Governors in supersession of Medical Council of India.

  All registered medical practitioners intending to provide online consultation need to complete a mandatory online course within 3 years of its notification.

  In the interim period, the principles mentioned in these guidelines need to be followed.

  Thereafter, undergoing and qualifying such a course, as prescribed, will be essential prior to
practice of telemedicine.

1.4 TELEMEDICINE APPLICATIONS .

. 1.4.1  Tools for Telemedicine

. 1.4.2  Telemedicine applications can be classified into four basic types, according to the mode of communication, timing of the information transmitted, the purpose of the consultation and the interaction between the individuals involved—be it RMP-to-patient / caregiver, or RMP to RMP.

1.4.2.1 According to the Mode of Communication

  Video(Telemedicinefacility,Apps,Videoonchatplatforms,Skype/Facetimeetc.)

  Audio(Phone,VOIP,Appsetc.)

  Text Based:

o Telemedicine chat based applications (specialized telemedicine smartphone Apps, Websites, other internet-based systems etc.)

o General messaging/ text/ chat platforms (WhatsApp, Google Hangouts, Facebook Messenger etc.) o Asynchronous (email/ Fax etc.)

1.3 REGISTERED MEDICAL PRACTITIONERS ARE ENTITLED TO PRACTICE TELEMEDICINE: ALL

OF THEM WILL TAKE AN ONLINE COURSE ON PRACTICE OF TELEMEDICINE .

RMP may use any telemedicine tool suitable for carrying out technology-based patient consultation e.g. telephone, video, devices connected over LAN, WAN, Internet, mobile or landline phones, Chat Platforms like WhatsApp, Facebook Messenger etc., or Mobile App or internet based digital platforms for telemedicine or data transmission systems like Skype/ email/ fax etc.

Irrespective of the tool of communication used, the core principles of telemedicine practice remain the same.

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : असाधारण 35 1.4.2.2 According to timing of information transmitted

 

Real time Video/audio/text interaction

Asynchronous exchange of relevant information

Video/audio/text for exchange of relevant information for diagnosis, medication and health education and counseling

Transmission of summary of patient complaints and supplementary data including images, lab reports and/or radiological investigations between stakeholders. Such data can be forwarded to different parties at any point of time and thereafter accessed per convenience/need

1.4.2.3 According to the purpose of the consultation

For Non-Emergency consult:

First consult with any RMP for

diagnosis/treatment/health education/ counseling

Follow-up consult with the same RMP

            

Patients may consult with an RMP for diagnosis and treatment of her condition or for health education and counseling

Patients may use this service for follow up consultation on his ongoing treatment with the same RMP who prescribed the treatment in an earlier in-person consult.

     

Emergency consult for immediate assistance or first aid etc.

In case alternative care is not present, tele-consultation might be the only way to provide timely care. In such situations, RMPs may provide consultation to their best judgement. Telemedicine services should however be avoided for emergency care when alternative in-person care is available, and telemedicine consultation should be limited to first aid, life-saving measure, counseling and advice on referral.

In all cases of emergency, the patient must be advised for an in-person interaction with an RMP at the earliest.

1.4.2.4 According to the individuals involved

   

Patient to RMP

Caregiver to RMP

      

Telemedicine services may connect patients to an RMP

Telemedicine services may connect Care givers to an RMP, under certain conditions as detailed in Framework (Section 4)

RMP to RMP

Health worker to RMP

RMP may use telemedicine services to discuss with other RMPs issues of care of one or more patients, or to disseminate knowledge

A Health Worker1 can facilitate a consultation session for a patient with an RMP. In doing so, the former can help take history, examine the patient and convey the findings. They can also explain/reinforce the advice given by the RMP to the patient.

2.

Technology Used & Mode of Communications

Audio, or Text (chat, messaging, email, fax etc.)

Multiple technologies can be used to deliver telemedicine consultation.

Each one of these technology systems has their respective

strengths, weaknesses and contexts, in which, they may be appropriate or inadequate to deliver a proper

diagnosis.

It is therefore important to understand the strengths, benefits as well as limitations of different technologies.

Broadly, though telemedicine consultation provides safety to the RMP from contagious conditions, it cannot replace physical examination that may require palpation, percussion or auscultation; that requires physical touch and feel. Newer technologies may improve this drawback.

1Nurse, Allied Health Professional, Mid-level health provider, ANM or any other health worker designated by an appropriate authority

There are 3 primary modes: Video,

36

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

STRENGTHS AND LIMITATIONS OF VARIOUS MODES OF COMMUNICATION

   

Mode

Strengths

Limitations

    

  Closest to an in person-consult, real time interaction

  Patient identification is easier

  RMP can see the patient and discuss
with the caregiver

  Visual cues can be perceived

  Inspection of patient can be carried
out

  Is dependent on high quality internet connection at both ends, else will lead to a sub optimal exchange of information

  Since there is a possibility of abuse/ misuse, ensuring privacy of patients in video consults is extremely important

 

VIDEO:

Telemedicine facility,
Apps,
Video on chat platforms, Facetime etc.

    

  Convenient and fast

  Unlimited reach

  Suitable for urgent cases

  No separate infrastructure required

  Privacy ensured

  Real-time interaction.

  Non-verbal cues may be missed

  Not suitable for conditions that require a visual inspection (e.g. skin, eye or tongue examination), or physical
touch

  Patient identification needs to be clearer, greater chance of imposters representing the real patient

 

AUDIO:

Phone, VOIP, Apps etc.

     

  Convenient and quick

  Documentation & Identification may
be an integral feature of the platform

  Suitable for urgent cases, or follow- ups, second opinions provided RMP has enough context from other
sources,

  No separate infrastructure required,

  Can be real time

  Besides the visual and physical touch, text-based interactions also miss the verbal cues

  Difficult to establish rapport with the patient.

  Cannot be sure of identity of the doctor or the patient

 

TEXT BASED: Specialized Chat based Telemedicine Smartphone Apps, SMS, Websites, messaging systems WhatsApp, Google Hangouts, FB Messenger

e.g.

    

  Convenient and easy to document

  No specific app or download
requirement

  Images, data, reports readily shared

  No separate infrastructure required

  More useful when accompanied with
test reports and follow up and second opinions

  Not a real time interaction, so just one-way context is available, relying solely on the articulation by the patient

  Patient identification is document based only and difficult to confirm

  Non-verbal cues are missed

  There may be delays because the
Doctor may not see the mail immediately

 

ASYNCHRO- NOUS:
Email
Fax, recordings etc.

3.

Guidelines for Telemedicine in India

The professional judgment of a Registered Medical Practitioner should be the guiding principle for all telemedicine consultations: An RMP is well positioned to decide whether a technology-based consultation is sufficient or an in-person review is needed. Practitioner shall exercise proper discretion and not compromise on the quality of care. Seven elements need to be considered before beginning any telemedicine consultation (see panel)

Seven Elements to be considered before any

[भाग III—ख ड 4]

भारत का राजप : असाधारण 37 telemedicine consultation

 

1 2 3 4 5 6 7

Context
Identification of RMP and Patient Mode of Communication Consent
Type of Consultation
Patient Evaluation
Patient Management

3.1 TELEMEDICINE SHOULD BE APPROPRIATE AND SUFFICIENT AS PER CONTEXT .

3.1.1 The Registered Medical Practitioners should exercise their professional judgment to decide whether a telemedicine consultation is appropriate in a given situation or an in-person consultation is needed in the interest of the patient. They should consider the mode/technologies available and their adequacy for a diagnosis before choosing to proceed with any health education or counseling or medication. They should be reasonably comfortable that telemedicine is in the patient’s interest after taking a holistic view of the given situation.

3.1.2 Complexity of Patient’s health condition

Every patient/case/medical condition maybe different, for example, a new patient may present with a simple complaint such as headache while a known patient of Diabetes may consult for a follow-up with emergencies such as Diabetic Ketoacidosis. The RMP shall uphold the same standard of care as in an in-person consultation

but within the intrinsic limits of telemedicine.

3.2 IDENTIFICATION OF THE REGISTERED MEDICAL PRACTITIONER AND THE PATIENT IS

REQUIRED .

. 3.2.1  Telemedicine consultation is should not be anonymous: both patient and the RMP need to know each other’s identity.

. 3.2.2  An RMP should verify and confirm patient’s identity by name, age, address, email ID, phone number, registered ID or any other identification as may be deemed to be appropriate. The RMP should ensure that there is a mechanism for a patient to verify the credentials and contact details of the RMP.

. 3.2.3  For issuing a prescription, the RMP needs to explicitly ask the age of the patient, and if there is any doubt, seek age proof. Where the patient is a minor, after confirming the age, tele consultation would be allowed only if the minor is consulting along-with an adult whose identity needs to be ascertained.

3.2.4 An

RMP should begin the consultation by informing the patient about his/her name and qualifications.

3.2.5 Every RMP shall display the registration number accorded to him/her by the State Medical Council/MCI, on prescriptions, website, electronic communication (WhatsApp/ email etc.) and receipts etc. given to his/her patients.

3.3 MODE OF TELEMEDICINE

.

3.3.1 Multiple

technologies can be used to deliver telemedicine consultations. All these technology systems have their respective strengths, weaknesses and contexts in which they may be appropriate or inadequate in order to deliver proper care.

. 3.3.2  Primarily there are 3 modes: Video, Audio or Text (chat, images, messaging, email, fax etc.). Their strengths, limitations and appropriateness as detailed in Section 2 need to be considered by the RMP.

. 3.3.3  There may be situations where in order to reach a diagnosis and to understand the context better; a real-time consultation may be preferable over an asynchronous exchange of information. Similarly, there would be

38 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

conditions where an RMP could require hearing the patient speak, therefore, a voice interaction may be preferred than an email or text for a diagnosis. There are also situations where the RMP needs to visually examine the patient and make a diagnosis. In such a case, the RMP could recommend a video consultation. Considering the situation, using his/her best judgment, an RMP may decide the best technology to use to diagnose and treat.

3.4 PATIENT CONSENT

Patient consent is necessary for any telemedicine consultation. The consent can be Implied or explicit depending on the following situations:

. 3.4.1  If, the patient initiates the telemedicine consultation, then the consent is implied2.

. 3.4.2  An Explicit patient consent is needed if:
A Health worker, RMP or a Caregiver initiates a Telemedicine consultation.

.

3.4.3 An Explicit consent can be recorded in any form. Patient can send an email, text or audio/video message. Patient can state his/her intent on phone/video to the RMP (e.g. “Yes, I consent to avail consultation via telemedicine” or any such communication in simple words). The RMP must record this in his patient records.

3.5 EXCHANGE OF INFORMATION FOR PATIENT EVALUATION P

3.5.1 Patient’s Information

–  An RMP would use his/her professional discretion to gather the type and extent of patient information (history/examination findings/Investigation reports/past records etc.) required to be able to exercise proper clinical judgement.

–  This information can be supplemented through conversation with a healthcare worker/provider and by any information supported by technology-based tools.

–  If the RMP feels that the information received is inadequate, then he/she can request for additional information from the patient. This information may be shared in real time or shared later via email/text, as per the nature of such information. For example, an RMP may advise some laboratory or/and radiological tests to the patient. In such instances, the consult may be considered paused and can be resumed at the rescheduled time. An RMP may provide health education as appropriate at any time.

–  Telemedicine has its own set of limitations for adequate examination. If a physical examination is critical information for consultation, RMP should not proceed until a physical examination can be arranged through an in-person consult. Wherever necessary, depending on professional judgement of the RMP, he/she shall recommend:

–  Video consultation

–  Examination by another RMP/ Health Worker.

–  In-person consultation

2. Implied Consent: In an in-person consultation, it is assumed the patient has consented to the consult by his/her actions. When the patient walks in an OPD, the consent for the consultation is taken as implied. Like an in-person consultation, for most of the tele-consultations the consent can be assumed to be implied because the patient has initiated the consultation.

RMPs must make all efforts to gather sufficient medical information about the patient’s condition before making any

professional judgment.

The information required may vary from one RMP to another based on his/her professional experience and discretion and for different medical conditions based on the defined clinical standards and standard

treatment guidelines.

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : असाधारण 39 –

3.6 TYPES OF CONSULTATION: FIRST CONSULT/ FOLLOW-UP CONSULT . There are two types of patient consultations, namely, first consult and the follow-up consult.

. 3.6.1  First Consult means

  The patient is consulting with the RMP for the first time; or

  The patient has consulted with the RMP earlier, but more than 6 months have lapsed since the
previous consultation; or

  The patient has consulted with the RMP earlier, but for a different health condition

. 3.6.2  Follow-Up Consult(s)means

 The patient is consulting with the same RMP within 6 months of his/her previous in-person consultation and this is for continuation of care of the same health condition. However,

it will not be considered a follow up if:

  There are new symptoms that are not in the spectrum of the same health condition; and/or

  RMP does not recall the context of previous treatment and advice

3.7 PATIENT MANAGEMENT: HEALTH EDUCATION, COUNSELING& MEDICATION . 3.7.1 If the condition can be appropriately managed via telemedicine, based on the type of consultation, then the

RMP may proceed with a professional judgement to:
o Provide Health Education as appropriate in the case; and/or

o Provide Counseling related to specific clinical condition; and/or

o Prescribe Medicines

. 3.7.2  Health Education: An RMP may impart health promotion and disease prevention messages. These could be related to diet, physical activity, cessation of smoking, contagious infections and so on. Likewise, he/ she may give advice on immunizations, exercises, hygiene practices, mosquito control etc.

. 3.7.3  Counseling: This is specific advice given to patients and it may, for instance, include food restrictions, do’s and don’t’s for a patient on anticancer drugs, proper use of a hearing aid, home physiotherapy, etc to mitigate the underlying condition. This may also include advice for new investigations that need to be carried out before the next consult.

  

RMP shall maintain all patient records including case history, investigation reports, images, etc. as

appropriate.

An RMP may have only a limited understanding of the patient seeking teleconsultation for the first time, when there have been no prior in-person consultation. However, if the first consult happens to be via video, RMP can make a

much better judgment and hence can provide much better advice including additional medicines, if indicated.

On the other hand, if a patient has been seen in-person earlier by the RMP, then it is possible to be more comprehensive

in managing the patient.

3.7.4 Prescribing Medicines

Prescribing medications, via telemedicine consultation is at the professional discretion of the RMP. It entails the same professional accountability as in the traditional in-person consult. If a medical condition requires a particular protocol to diagnose and prescribe as in a case of in-person consult then same prevailing principle will be applicable to a telemedicine consult.

RMP may prescribe medicines via telemedicine ONLY when RMP is satisfied that he/ she has gathered adequate and relevant information about the patient’s medical condition and prescribed medicines are in the best interest of the patient.

Prescribing Medicines without an appropriate diagnosis/provisional diagnosis will amount to a professional misconduct

40 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

Specific Restrictions

There are certain limitations on prescribing medicines on consult via telemedicine depending upon the type of consultation and mode of consultation. The categories of medicines that can be prescribed via tele-consultation will be as notified in consultation with the Central Government from time to time.

The categories of medicines that can be prescribed are listed below:

 List O: It will comprise those medicines which are safe to be prescribed through any mode of tele- consultation. In essence they would comprise of

o Medicines which are used for common conditions and are often available ‘over the counter’. For instance, these medicines would include, paracetamol, ORS solutions, cough lozenges etc

o Medicines that may be deemed necessary during public health emergencies.

 List A: These medications are those which can be prescribed during the first consult which is a video consultation and are being re-prescribed for re-fill, in case of follow-up.

 

o This would be an inclusion list, containing relatively safe medicines with low potential for abuse Is a list of medication which RMP can prescribe in a patient who is undergoing follow-up consult, as a refill.

  List B: Is a list of medication which RMP can prescribe in a patient who is undergoing follow-up consultation in addition to those which have been prescribed during in-person consult for the same medical condition.

  Prohibited List: An RMP providing consultation via telemedicine cannot prescribe medicines in this list. These medicine have a high potential of abuse and could harm the patient or the society at large if used improperly

o Medicines listed in Schedule X of Drug and Cosmetic Act and Rules or any Narcotic and Psychotropic substance listed in the Narcotic Drugs and Psychotropic Substances, Act, 1985

The drugs in the above mentioned list is summarized in Annexure 1 Issue a Prescription and Transmit

o If the RMP has prescribed medicines, RMP shall issue a prescription as per the Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations and shall not contravene the provisions of the Drugs and Cosmetics Act and Rules. A sample format is suggested in Annexure 2

o photo, scan, digital copy of a signed prescription or e-Prescription to the patient o

RMP shall provide

via email or any messaging platform

In case the RMP is transmitting the prescription directly to a pharmacy, he/ she must ensure explicit consent of the patient that entitles him/her to get the medicines dispensed from any pharmacy of his/

her choice

Table: Matrix of the permissible drug lists based on the type and mode of consultation

  

List Group

Mode of Consultation [Video/Audio/Text]

Nature of Consultation [First-consultation/ Follow-up]

List of Medicines

List O1

         

O

Any

Any

List A2

         

A

Video

First Consultation Follow-up, for continuation of medications

List B3

         

B

Any

Follow-up

        

Prohibited

Not to be prescribed

Not to be prescribed

Schedule X of Drug and Cosmetic Act and Rules or any Narcotic and Psychotropic substance listed in the Narcotic Drugs and Psychotropic Substances, Act, 19854

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : असाधारण 41

 

1. This list included commonly used ‘over-the-counter’ medications such as Paracetamol, Oral Rehydration Solution (ORS) packets, Antacids etc.
This list also includes medicines that may be deemed necessary during emergencies and would be notified from time to time.

2. This list includes usually prescribed medications for which diagnosis is possible only by video consultation such as antifungal medications for Tinea Cruris, Ciprofloxacillin eye drops for Conjunctivitis etc. and Re-fill medications for chronic diseases such as Diabetes, Hypertension, Asthma etc

3. This list includes ‘add-on’ medications which are used to optimize an existing condition. For instance, if the patient is already on Atenolol for hypertension and the blood pressure is not controlled, an ACE inhibitor such as Enalapril

4. For instance, Anti-Cancer drugs; Narcotics such as Morphine, Codeine etc

3.7 DUTIES AND RESPONSIBILITIES OF A RMP IN GENERAL

3.7.1 MEDICAL ETHICS, DATA PRIVACY & CONFIDENTIAILITY3

3.7.1.1 Principles of medical ethics, including professional norms for protecting patient privacy and

confidentiality as per IMC Act shall be binding and must be upheld and practiced.

. 3.7.1.2  Registered Medical Practitioner would be required to fully abide by Indian Medical Council (Professional conduct, Etiquette and Ethics) Regulations, 2002 and with the relevant provisions of the IT Act, Data protection and privacy laws or any applicable rules notified from time to time for protecting patient privacy and confidentiality and regarding the handling and transfer of such personal information regarding the patient. This shall be binding and must be upheld and practiced.

. 3.7.1.3  Registered Medical Practitioners will not be held responsible for breach of confidentiality if there is a reasonable evidence to believe that patient’s privacy and confidentiality has been compromised by a technology breach or by a person other than RMP. The RMPs should ensure that reasonable degree of care undertaken during hiring such services.

3.7.1.4 Misconduct

It is specifically noted that in addition to all general requirements under the MCI Act for professional conduct, ethics etc, while using telemedicine all actions that wilfully compromise patient care or privacy and confidentiality, or violate any prevailing law are explicitly not permissible.

Some examples of actions that are not permissible:

  RMPs insisting on Telemedicine, when the patient is willing to travel to a facility and/or requests an in-person consultation

  RMPs misusing patient images and data, especially private and sensitive in nature (e.g. RMP uploads an explicit picture of patient on social media etc)

  RMPs who use telemedicine to prescribe medicines from the specific restricted list

  RMPs are not permitted to solicit patients for telemedicine through any advertisements or

inducements

3.7.1.5 Penalties: As per IMC Act, ethics and other prevailing laws.

3.7.2 MAINTAIN DIGITAL TRAIL/ DOCUMENTATION OF CONSULTATION

It is incumbent on RMP to maintain the following records/ documents for the period as prescribed from time to time:

3.7.2.1 Log or record of Telemedicine interaction (e.g. Phone logs, email records, chat/ text record, video interaction logs etc.).

3. It is the responsibility of the RMP to be cognizant of the current Data Protection and Privacy laws. RMP shall not breach the patient’s confidentiality akin to an in-person consultation. For example: If the RMP is planning to create virtual support group for disseminating health education for patients suffering from a particular disease condition then he/she shall be wary of the patient’s willingness and not violate patient’s privacy and confidentiality by adding them to the group without their consent.

42

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

. 3.7.2.2  Patient records, reports, documents, images, diagnostics, data etc. (Digital or non-Digital) utilized in the telemedicine consultation should be retained by the RMP.

. 3.7.2.3  Specifically, in case a prescription is shared with the patient, the RMP is required to maintain the prescription records as required for in-person consultations.

3.7.3

Fee for Telemedicine Consultation
3.7.3.1 Telemedicine consultations should be treated the same way as in-person consultations from a fee

perspective: RMP may charge an appropriate fee for the Telemedicine consultation provided.

3.7.3.2 An RMP should also give a receipt/invoice for the fee charged for providing telemedicine-based consultation.

4.
This section lays out the framework for practicing telemedicine in 5scenarios:

1. Patient to Registered Medical Practitioner

2. Caregiver to Registered Medical Practitioner

3. Health Worker to Registered Medical Practitioner

4. Registered Medical Practitioner to Registered Medical Practitioner

5. Emergency Situations

Essential Principles:

–  The professional judgement of a Registered Medical Practitioner should be the guiding principle: an RMP is well positioned to decide whether a technology-based consultation is sufficient, or an in-person review is needed. Practitioner shall exercise proper discretion and not compromise on the quality of care

–  Same principles apply irrespective of the mode (video, audio, text) used for a telemedicine consultation. However, the patient management and treatment can be different depending on the mode of communication used.

–  RMP should exercise his/her professional discretion for the mode of communication depending on the type of medical condition. If a case requires a video consultation for examination, RMP should explicitly ask for it

–  The RMP can choose not to proceed with the consultation at any time. At any step, the RMP may refer or request for an in-person consultation

–  At any stage, the patient has the right to choose to discontinue the teleconsultation

4.1 CONSULTATION BETWEEN PATIENT AND REGISTERED MEDICAL PRACTITIONER

Specifically, this section details with the key elements of the process of teleconsultation to be used in the First consults and Follow up consults when a patient consults with an RMP.

In these 2 situations, the patient initiates telemedicine consultation and thereby consent is implied

4.1.1 First Consult: Patient to Registered Medical Practitioner 4.1.1.1 First Consult means

1. The patient is consulting with the RMP for the first time; or

2. The patient has consulted with the RMP earlier, but more than 6 months have lapsed since the previous consultation; or

3. The patient has consulted with the RMP earlier, but for a different health condition

4.1.1.2 Tele-Consultation Process

The flow of the process is summarized in the Figure 1 and the steps are detailed below.

Framework for Telemedicine

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : असाधारण 43

 

1.

2.

3.

Start of a Telemedicine Consultation for First Consult

o The telemedicine consultation is initiated by the patient (For example, a patient may do an audio or video call with a RMP or send an email or text with a health query)

o RMP accepts to undertake the consultation Patient identification and consent

o RMP should confirm patient identity to his/her satisfaction by asking patient’s name, age, address, email ID, phone number or any other identification that may be reasonable

o Telemedicine consultation should be initiated by the patient and thereby consent is implied Quick assessment:

o The patient’s condition needs to be quickly assessed by the RMP based on available inputs and RMP uses his professional discretion if emergency care is needed, to decide if emergency care is needed.

o If the condition of the patient merits emergency intervention, then advice for first aid/ immediate relief is provided and guidance is provided for referral, as appropriate.

If the condition does not merit an emergency intervention, the following steps are undertaken:

4.

Exchange of Information for Patient Evaluation

o The RMP may ask the patient to provide relevant information (complaints, information about any other consults for the same problem, available investigation and medication details, if any). The patient shall be responsible for accuracy of information shared by him/her with the RMP.

o If the RMP feels that the information provided at this stage is inadequate, then he/she shall request for additional information from the patient. This information may be shared in real time or shared later via email/text, as per the nature of such information. The consultation may be resumed at a rescheduled time after receipt of the additional information (this may include some laboratory or radiological tests). In the meantime, the RMP may provide health advice as appropriate.

o If the RMP is satisfied that he/she has adequate patient information for offering a professional opinion, then he/she shall exercise one’s professional judgment for its suitability for management via telemedicine.

o If the situation is NOT appropriate for further telemedicine consultation, then the RMP should provide Health advice/ Education as appropriate; and/or refer for in-person consultation.

Patient Management

If the condition can be appropriately managed via telemedicine, then the RMP may take a professional judgement to either:

o Provide Health Education as appropriate in the case; and/or
o Provide Counseling related to specific clinical condition, including advice related to new

investigations that need to be carried out before next consult; and/or

o Provide specific treatment by prescribing medicines as in List O (which are over the counter drugs or others as notified). Additional medicines (as per List A) can also be prescribed if the ongoing tele-consultation is on video.

5.

4.1.2 Follow-up Consult: Patient to Registered Medical Practitioner

In a follow-up consultation, since the RMP-patient interaction has already taken place for the specific medical condition under follow-up, there is already an understanding of the context, with availability of previous records. This allows a more definitive and secure interaction between the RMP and the patient.

4.1.2.1 Follow-Up Consult means

The patient is consulting with the RMP within 6 months of his/her previous in-person, and this consultation is for continuation of care of the same health condition. Follow-up can be in situations of a chronic disease or a treatment (e.g. renewal or change in medications) when a face-to-face consultation is not necessary. Examples of such chronic diseases are: asthma, diabetes, hypertension and epilepsy etc

44 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

4.1.2.2 Tele-Consultation Process

The flow of the process is summarized in Figure 2 and the steps are detailed below:

1. Start of a Telemedicine Consultation for Follow Up

o Patient may initiate a follow up consult with a RMP for continuation of his/her ongoing treatment or for a new complaint or complication arising during the course of the ongoing treatment using any mode of communication. For e.g., the patient may do an audio or video call with a RMP or send him/her an email or text message with a specific health query

o RMP accepts to undertake the consultation

2. Patient identification and consent
o o
o Patient initiates the Telemedicine consultation and thereby consent is implied

3. Quick Assessment for Emergency Condition
o

4. In case of routine follow-up consultation, the following would be undertaken: o
o o

5. Patient Management
o o

RMP should be reasonably convinced that he/she is communicating with the known patient, for e.g. if the patient is communicating with RMP through the registered phone number or

registered email Id

If there is any doubt RMP can request the patient to reinitiate the conversation from a registered phone number or email id or should confirm patient identity to his/her satisfaction by asking patient’s name, age, address, email ID or phone number. [Details in the section

3.2]

If the patient presents with a complaint which the RMP identifies as an emergency condition necessitating urgent care, the RMP would then advice for first aid to provide immediate relief

and guide for referral of the patient, as deemed necessary.

If the RMP has access to previous records of the patient, he/ she may proceed with

continuation of care.

RMP shall apply his/her professional discretion for type of consultation based on the

adequacy of patient information (history/examination findings/Investigation reports/past

records).

If the RMP needs additional information, he/ she should seek the information before

proceeding and resume tele-consultation for later point in time.

If RMP is satisfied that he/she has access to adequate patient information and if the condition

can be appropriately managed by tele-consultation, he/she would go ahead with the tele-

management of the patient.

If the follow-up is for continuation of care, then the RMP may take a professional judgement

to either:

o Provide health education as appropriate in the case; or
o Provide counseling related to specific clinical condition including advice related to new

investigations that need to be carried out before next consult;
o And/or Prescribe Medications. The medications could be either of the below:

  

If the follow up is for continuation of care for the same medical condition, the RMP would re-prescribe original set of medications for a refill (List A of medications,

which has been previously prescribed for the patient).

If the RMP considers addition of a new drug, as an ‘add-on’ medication to optimize the underlying medical condition, then the RMP can prescribe medications listed

under List B.

If the follow-up consult is for a new minor ailment necessitating only ‘over the counter’ medications or those notified for this purpose, medications under List O

can be prescribed.

[भाग III—ख ड 4]

भारत का राजप : असाधारण 45

  

If the follow-up consult reveals new symptom pertaining to a different spectrum of disease, then the RMP would proceed with the condition as enunciated in the

scenario for a first-time consultation (4.1.1).

4.2 CONSULTATION BETWEEN PATIENT AND RMP THROUGH A CAREGIVER

2. Patient is not present with the Caregiver. This may be the case in the following:

In all of the above, the consult shall proceed as in the case of RMP and the patient (first or follow up consult, vide 4.1)

4.2 CONSULTATION BETWEEN HEALTH WORKER AND RMP
For the purpose of these guidelines, “Health worker” could be a Nurse, Allied Health Professional, Mid-Level

Health Practitioner, ANM or any other health worker designated by an appropriate authority Proposed Set up

4.2.1 For the purpose of these guidelines “Caregiver” could be a family member, or any person authorized by the patient to represent the patient.

4.2.2There could be two possible settings:
1. Patient is present with the Caregiver during the consultation.

2a. Patient is a minor (aged 16 or less) or the patient is incapacitated, for example, in medical conditions like dementia or physical disability etc. The care giver is deemed to be authorized to consult on behalf of the patient.

2b. Caregiver has a formal authorization or a verified document establishing his relationship with the patient and/or has been verified by the patient in a previous in-person consult (explicit consult).

1.

2.

3.

o This sub section will cover interaction between a Health Worker seeking consultation for a patient in a public or private health facility.

o In a public health facility, the mid-level health practitioner at a Sub-center or Health and wellness center can initiate and coordinate the telemedicine consultation for the patient with a RMP at a higher center at district or State or National level. Health and Wellness centers are an integral part of comprehensive primary health care.

o This setting will also include health camps, home visits, mobile medical units or any community- based interaction.

Tele-Consultation Process

The flow of the process is summarized in Figure 3 and the steps are detailed below:

Start of a Telemedicine Consultation through a Health Worker/RMP

o The premise of this consultation is that a patient has been seen by the Health worker

o In the judgment of the health worker, a tele-consultation with a RMP is required

o Health Worker should obtain the patient’s informed consent

o Health worker should explain potential use and limitations of a telemedicine consultation

o He/she should also confirm patient identity by asking patient’s name, age, address, email ID, phone number or any other identification that may be reasonable

o Health Worker initiates and facilitates the telemedicine consultation. Patient Identification (by RMP)

o RMP should confirm patient identity to his/her satisfaction by asking patient’s name, age, address, email ID, phone number or any other identification that may be reasonable

o RMP should also make their identity known to the patient Patient Consent (by RMP):

o RMP should confirm the patient’s consent to continue the consultation

46 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

4. In case of Emergency,

o The Health Worker would urgently communicate about the underlying medical condition of the patient to the RMP.

o If based on information provided, if the RMP i

In case, the condition is not an emergency, the following steps would be taken:

5. Exchange of Information for Patient Evaluation (by RMP)
o The Health Worker must give a detailed explanation of their health problems to the RMP

which can be supplemented by additional information by the patient, if required.

o The RMP shall apply his professional discretion for type and extent of patient information (history/examination findings/Investigation reports/past records) required to be able to exercise proper clinical judgement.

o If the RMP feels that the information provided is inadequate, then he/she shall request for additional information. This information may be shared in real time or shared later via email/text, as per the nature of such information. For e.g., RMP may advice some laboratory or/and radiological tests for the patient. For such instances, the consult may be considered paused and can be resumed at the rescheduled time. RMP may provide health education as appropriate at any time.

6. Patient Management

o Once the RMP is satisfied that the available patient information is adequate and that the case is appropriate for management via telemedicine, then he/she would proceed with the management. Health worker should document the same in his/her records.

o The RMP may take a professional judgement to either:

o Provide health education as appropriate in the case,

o Provide counseling related to specific clinical condition including advice related to new investigations that need to be carried out before next consult;

o And/or prescribe medications.
 as prescribed for use in guidelines from time to time for a particular cadre of Health

Workers.

5.2 Role of Health Worker:

Health worker must provide the immediate relief/first aid as advised by the RMP and facilitate the referral of the patient for appropriate care. The Health Worker must ensure that patient is advised for an in-person interaction with an RMP, at the earliest.

dentifies it as an emergency condition

necessitating urgent care, he/she should advice for first aid to be provided by the Health

Worker for immediate relief and guide for referral of the patient, as deemed necessary.

In all cases of emergency, the Health Worker must seek measures for immediate relief and first-aid from the RMP who

is being tele-consulted.

For patients who can be suitably managed via telemedicine, the Health Worker plays a vital role of

  Reinforcing the health education and counseling provided by the RMP

  Providing the medicine prescribed by the RMP and providing patient counseling on his/her treatment.

4.4 REGISTERED MEDICAL PRACTITIONER TO ANOTHER RMP/ SPECIALIST

. .

  Registered Medical Practitioner might use telemedicine services to consult with another RMP or a specialist for a patient under his/her care. Such consultations can be initiated by a RMP on his/her professional judgement.

  The RMP asking for another RMP’s advice remains the treating RMP and shall be responsible for treatment and other recommendations given to the patient.

  It is acknowledged that many medical specialties like radiology, pathology, ophthalmology, cardiology, dermatology etc. may be at advanced stages of adoption of technology for exchange of information or some may be at early stage. Guidelines support and encourage interaction between RMPs/ specialists using information technology for diagnosis, management and prevention of disease.

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : असाधारण 47 o

  

Tele-radiology is the ability to send radiographic images (x-rays, CT, MRI, PET/CT, SPECT/CT,

MG, Ultrasound) from one location to another.

Tele-pathology is use of technology to transfer image-rich pathology data between distant locations

o

o

4.5 EMERGENCY SITUATIONS

. .

for the purposes of diagnosis, education, and research.

Tele-ophthalmology access to eye specialists for patients in remote areas, ophthalmic disease

screening, diagnosis and monitoring.

In all telemedicine consultations, as per the judgment of the RMP, if it is an emergency situation, the goal and objective should be to provide in-person care at the soonest. However critical steps could be life-saving and guidance and counseling could be critical. For example, in cases involving trauma, right advice and guidance around maintaining the neck position might protect the spine in some cases. The guidelines are designed to provide a balanced approach in such conditions. The RMP, based on his/ her professional discretion may

o Advise first aid o Counseling
o Facilitate referral

5. Guidelines for Technology Platforms enabling Telemedicine

This specifically covers those technology platforms which work across a network of Registered medical practitioners and enable patients to consult with RMPs through the platform

. 5.1  Technology platforms (mobile apps, websites etc.) providing telemedicine services to consumers shall be obligated to ensure that the consumers are consulting with Registered medical practitioners duly registered with Medical Council of India or respective state medical council and comply with relevant provisions

. 5.2  Technology Platforms shall conduct their due diligence before listing any RMP on its online portal. Platform must provide the name, qualification and registration number, contact details of every RMP listed on the platform

. 5.3  In the event some non-compliance is noted, the technology platform shall be required to report the same to BoG, in supersession to MCI who may take appropriate action

. 5.4  Technology platforms based on Artificial Intelligence/Machine Learning are not allowed to counsel the patients or prescribe any medicines to a patient. Only a RMP is entitled to counsel or prescribe and has to directly communicate with the patient in this regard. While new technologies such as Artificial Intelligence, Internet of Things, advanced data science-based decision support systems etc. could assist and support a RMP on patient evaluation, diagnosis or management, the final prescription or counseling has to be directly delivered by the RMP

. 5.5  Technology Platform must ensure that there is a proper mechanism in place to address any queries or grievances that the end-customer may have

. 5.6  Incase any specific technology platform is found in violation, BoG, MCI may designate the technology platform as blacklisted, and no RMP may then use that platform to provide telemedicine

6. Special responsibilities of Board of Governors in supersession to Medical Council of India (BoG-MCI)

6.1 Any of the drug-lists contained in Telemedicine Practice Guidelines can be modified by the Board of Governors in super-session of the Medical Council of India/Medical Council of India from time to time, as required.
6.2 The Board of Governors in super-session of the Medical Council of India may issue necessary directions or advisories or clarifications in regard to these Guidelines, as required.

6.3 The Telemedicine Practice Guidelines can be amended from time to time in larger public interest with the prior approval of Central Government [Ministry of Health and Family Welfare, Government of India].

In all cases of emergency, the patient MUST be advised for an in-person interaction with a Registered Medical

Practitioner at the earliest

48 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

Flow charts

Figure 1: Flow chart for teleconsultation for first consult

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : असाधारण 49

Figure 2:Flow Chart for teleconsultation on follow-up Consult

50 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

   

[भाग III—ख ड 4] भारत का राजप : असाधारण 51 Annexures

 

Annexure 1

MEDICINE LISTS

List O

 Common over-the counter medications such as o Antipyretics: Paracetamol

o Cough Supplements: Lozenges,
o Cough/ Common-cold medications (such as combinations of Acetylcysteine, Ammonium Chloride,

Guaifensen, Ambroxol, Bromhexene, Dextromethorphan) o ORS Packets

o Syrup Zinc
o Supplements: Iron & Folic Acid tablets, Vitamin D, Calcium supplements o Etc

 Medications notified by Government of India in case from time to time on an Emergency basis
o Such as Chloroquine for Malaria control for a specific endemic region, when notified by Government

List A
 First Consult Medications (Diagnosis done on video mode of consultation) such as

o Ointments/Lotion for skin ailments: Ointments Clotrimazole, Mupirocin, Calamine Lotion, Benzyl Benzoate Lotion etc

o Local Ophthalmological drops such as: Ciprofloxacillin for Conjunctivitis, etc o Local Ear Drops such as: Clotrimazole ear drops, drops for ear wax etc..
o Follow-up consult for above medications

List B

.

 

Follow-up medications for chronic illnesses for ‘re-fill’ (on any mode of consultation) such as

 

medications for

o Hypertension: Enalapril, Atenolol etc
o Diabetes: Metformin, Glibenclamide etc o Asthma: Salmetrol inhaler etc
o Etc

On follow-up, medications prescribed as ‘Add-on’ to ongoing chronic medications to optimize

 

pertension: Eg, add-on of Thiazide diuretic with Atenolol o Diabetes: Addition of Sitagliptin to Metformin

o Etc

management such as for hY

52 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4]

 

Annexure 2

6.1 SAMPLE PRESCRIPTION FORMAT

.

 

Uploaded by Dte. of Printing at Government of India Press, Ring Road, Mayapuri, New Delhi-110064 and Published by the Controller of Publications, Delhi-110054.

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